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सैलानियों को लुभाता है तीन नदियों का संगम और पहाड़

7 वर्ष पहले
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चैनपुरकी प्राकृतिक छटा सैलानियों को आकर्षित करती हैं। शंख नदी, शफी नदी कुंदई नदी के संगम स्थल पर प्रत्येक वर्ष तीन महीने तक सैलानियों का तांता लगा रहता है। शंख नदी के तट पर प्रकृति की गोद में बैठकर पिकनिक मनाने के लिए छत्तीसगढ़, गुमला, रांची अन्य कई जगहों से लोग पहुंचते हैं। शंख नदी का मनोरम दृश्य जहां कलकल बहती नदियों और सुंदर नक्काशीदार पत्थर सैलानियों को दोबारा आने के लिए विवश करते हैं।

इसी नदी में राजा-रानी पत्थर प्रेमी युगलों का मन मोहता है। जहाज की आकृति में बना एक पत्थर, जिसको जहाजी पत्थर के नाम से जाना जाता है, वह यहां आने वाले सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। चैनपुर में हुकड़ा पहाड़ जहां ऊंचाई से गिरते झरने पिकनिक मनाने के लिए आने वालों का स्वागत करती हैं। वहीं चैनपुर की शंख नदी, जो चैनपुर होकर जारी जाने वाले मार्ग से गुजरती है।

इस मार्ग पर नवनिर्मित पुल की शोभा अनुपम है। हालांकि शंख नदी के तट पर सालों भर लोगों को पिकनिक मनाते देखा जा सकता है। चैनपुर के पूर्वी छोर पर स्थित लगभग एक हजार फीट की ऊंचाई वाले हुकड़ा पहाड़ को प्रखंड की सबसे ऊंची पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। इस पहाड़ी में एक गुफा ऐसी है, जिसका रास्ता रायडीह की पहाड़ी से निकलता है।

जानकारी के अनुसार पहले राजे रजवाड़े विपरीत परिस्थितियों में इस पहाड़ी गुफा का इस्तेमाल करते थे। चैनपुर के कुंदई नदी में बड़े-बड़े पत्थरों पर भीम पांजी के पैर का निशान अब तक मौजूद है। सैलानी इन सभी पर्यटन स्थलों पर दो पहिया, चार पहिया सहित बड़े वाहनों से भी आसानी से नदी तट तक पहुंच सकते हैं।

पिकनिक स्पॉट पर जुटने लगे हैं लोग।