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महज 37 करोड़ रुपए के लिए सिमडेगा नहीं पहुंच रही रेल

6 वर्ष पहले
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महज37 करोड़ रूपयों के चलते सिमडेगा जिला मुख्यालय नहीं पहुंच पा रही है रेल लाइन। इस बात का खुलासा सूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी से हुआ है। कई दशकों से इस आदिवासी बहुल जिले की जनता रेल लाइन की मांग करती रही है और लाइन बिछाने के लिए सर्वेक्षण भी हुआ है। लेकिन रेलवे बोर्ड सिमडेगा तक रेल लाइन लाने को घाटे का सौदा मानते हुए इसे टालता रहा है।

54किमी लाइन के लिए 2008 में हुआ था सर्वे

सूचनाअधिकार आवेदन में सिमडेगा जिला मुख्यालय को लोहरदगा से गुमला होते हुए सिमडेगा तक रेल लाइन के बारे जानकारी मांगी गई थी। रेलवे बोर्ड से उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार वर्ष 2008-09 में रेल लाइन बिछाने का सर्वे हुआ था और 54 किमी लंबी लाइन के लिए करीब सात सौ करोड़ रूपए खर्च का अनुमान लगाया गया था। सूचनाधिकार कार्यकर्ता दीपेश कुमार निराला द्वारा मांगी गई सूचना के जवाब में रेलवे बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर वर्क्स टू ने सर्वे में आरओआर यानि रेट ऑफ रिटर्न को माइनस 5.24 प्रतिशत बताया था और इस कारण इसे रेलवे के लिए घाटे का सौदा होने की बात कही थी। सात सौ करोड़ रूपए के प्राक्कलन में आरओआर के 5.24 प्रतिशत के आधार पर यह घाटा 36 करोड़ 68 लाख रूपए होता है।

15हजार लोगों ने भेजा था हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन

लोहरदगासे गुमला-सिमडेगा होते हुए राजगांगपुर तक रेल लाइन को जोड़ने के लिए लंबे समय से उठ रही मांग के क्रम में जिलावासियों के द्वारा हस्ताक्षर अभियान चलाया जा चुका है। 7 अक्टूबर 2011 को करीब 15 हजार लोगों के हस्ताक्षर वाला आवेदन सांसद कड़िया मुंडा द्वारा अग्रसारित होते हुए रेल मंत्री के पास भेजा गया था। 72 प्रतिशत जनजातीय आबादी वाले सिमडेगा जिले में घाटे की बात कहते हुए रेल लाइन नहीं लाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के दौरे पर आते रहे सांसद कड़िया मुंडा के समक्ष भी उक्त सवाल सूचनाधिकार कार्यकर्ता सह भाजपा सूचना अधिकार प्रकोष्ठ के जिला संयोजक निराला के द्वारा उठाया जाता रहा है और इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी 12 जनवरी 2015 को पत्र भेजा गया है।

सांसदसे लोकसभा में मामला उठाने की मांग

जिलेके दौरे पर आए सांसद कडि़या मुंडा को फिर रेल लाईन के लिए आवेदन सौंपा गया है। शनिवार को दिए गए आवेदन में रेलवे बोर्ड के पूर्व में हुए सर्वे बोर्ड द्वारा घाटे की बात कहते इस आदिवासी क्षेत्र की उपेक्षा करने की जानकारी दी गई है और इस मामले को लोक सभा में उठाने का आग्रह भाजपा के आरटीआई प्रकोष्ठ संयोजक द्वारा किया गया है।