बैंकों के काम भी होंगे प्रभावित
नहीं पहुंच पाएंगे जरूरी सामान
अधर में लटका है देवनदी पुल
बसों के पहिए थमे फंसे हैं ट्रक
दो हजार विद्यार्थी नहीं जा सकेंगे स्कूल-कॉलेज
आवागमन ठप होने से बानो वासियों में आक्रोश है। इस स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेवार मानते हुए बानो के लोग प्रखंड कार्यालय का घेराव करने की तैयारी में हैं। वहीं पुल बहने के बाद उपभोक्ता सामग्रियां, अखबार, दवाएं, गैस सिलेंडर, पेट्रोल डीजल के टैंकर अन्य सामान सड़क मार्ग से बानो नहीं पहुंच पाएंगे।
दो वर्ष पूर्व देवनदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद नए पुल का निर्माण शुरू किया गया था। लेकिन संवेदक द्वारा पुल को अधर में लटकाकर छोड़ दिया गया है। संवेदक अपना सामान समेटकर चला गया है।
हाल देखने नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
रविवारकी दोपहर तक कोई अधिकारी सोय के बहे पुल का हाल लेने तथा उत्पन्न स्थिति को देखने के लिए नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा के कारण ही बानो वासियों का यह हाल हो गया है। दो वर्षों से पुल निर्माण के लिए प्रशासनिक कोशिश होती रहती, तो देवनदी का पुल तैयार हो जाता।
सोय नाला पुल बहने के बाद रांची से मनोहरपुर, सिमडेगा से मनोहरपुर, बानो-सिमडेगा, बानो-गुमला समेत विभिन्न रूटों पर चलने वाली दर्जन भर बसों के पहिए थम गए हैं। लोग कहीं जा नहीं पा रहे हैं। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भी इलाज के लिए कहीं ले जाना मुश्किल है। कई ट्रक जो लंबी दूरी के लिए निकले थे, वे बानो में फंसे हुए हैं। पुल के दूसरी छोर में बस-ट्रक रुके हुए हैं।
रेल पुल से नदी पार कर रहे ग्रामीण
सड़कमार्ग बंद होने के बाद कुछ ग्रामीण जान जोखिम में डालकर रेल पुल से नदी पार कर रहे हैं। बताया जाता है कि कानारोंवा स्टेशन के पास देवनदी पर रेल पुल से पार कर रहे एक मोटरसाइकिल सवार ने जब देखा कि रेल रही है, तो उसने अपनी बाइक नदी में फेंक दी और पुल के किनारे लगे लोहे के ग्रिल में लटककर जान बचाई। एक स्कूली छात्र भी साइकिल से रेल पुल पार करने के क्रम में नदी में गिर गया था। घटना में उसकी जान बच गई थी।
हाटनहीं पहुंच पाए व्यापारी
पुलबहने के बाद ग्रामीण हाट आधारित अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है। रविवार को बानो के गांवों में लगने वाले साप्ताहिक हाट में व्यापारी नहीं पहुंच पाए। सोय, कोनसोदे, सेम्हातु और बेडाईरगी पंचायत के दर्जनों गांव पू