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गुमला में एथलेटिक्स का प्रशिक्षक नहीं

7 वर्ष पहले
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लुंजपुंज व्यवस्था और सरकार की उदासीन रवैये के कारण खेल प्रतिभाएं कुंठित हो रही हैं। तो खिलाड़ियों को सुविधाएं मिल रही हैं और खेल सामग्री। गुमला जिला में एथलेटिक्स का प्रशिक्षक भी नहीं है। वहीं एथलेटिक्स सेंटर में खिलाड़ियों की संख्या 25 से घटकर 12 रह गई है। स्पोर्ट्स लवर्स गुमला ने खिलाड़ियों की समस्याओं के समाधान को लेकर विचार मंथन का आयोजन किया। बताया जाता है कि झारखंड सरकार द्वारा खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं से गुमला जिला के खिलाड़ी वंचित रह जाते हैं।

गुमला जिला में झारखंड सरकार द्वारा संचालित दस सेंटर हैं। इसमें दो आवासीय तथा आठ डे बोर्डिंग सेंटर है। आवासीय सेंटर में एथलेटिक्स के प्रशिक्षक नहीं हैं। सेंटर में 25 की जगह अब 12 खिलाड़ी रह गए हैं। वे मैदान और भोजन की समुचित व्यवस्था की कमी से जूझ रहे हैं। उन्हें समय पर खेल सामग्री भी नहीं मिलती है। जबकि डे बोर्डिंग प्रशिक्षण केंद्र गुमला, सिसई, भरनो में बालिका फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र हैं। खिलाड़ियों को पौष्टिक आहार के लिए निर्धारित पांच सौ रुपए प्रोत्साहन राशि 2011-12 में सात महीने तथा 2014 में चार महीने की राशि नहीं मिली। डे बोर्डिंग सेंटर को अपने स्थापना वर्ष में एक बार ही खेल सामग्री मिली है। खिलाड़ियों का दुर्घटना बीमा नहीं हुआ है तथा आकस्मिक दुर्घटना होने पर इलाज की समुचित सुविधा नहीं है। स्पोर्ट्स लवर्स गुमला ने विचार मंथन के माध्यम से सामने आई बातों से उपायुक्त गुमला को अवगत कराने तथा उपायुक्त के माध्यम से झारखंड सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। मंथन शिविर में स्पोर्ट्स लवर्स गुमला के संयोजक कृष्णा उरांव, सुनील केरकेट्टा, मिसिर उरांव, महेंद्र भगत, जुम्मन खान, छोटे सोनी, करमा भगत, आशीष गोप संजय सिंह के अलावा 10 सेंटरों के खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं खेलप्रेमी उपस्थित थे।