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नक्सली बंद से थमा रहा वाहनों का परिचालन

6 वर्ष पहले
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भूमिअधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ नक्सलियों की ओर से आयोजित एक दिवसीय झारखंड बंद से गुमला जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। इस दौरान वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप रहा। ट्रक, यात्री बसों छोटे चार पहिया वाहनों के नहीं चलने से यात्रियों को भारी परेशानी हुई।

वहीं वाहनों के नहीं चलने से जिले के सभी प्रखंडों का जिला मुख्यालय से संपर्क कटा रहा। व्यापारिक गतिविधियां बाधित रही। छोटे-मोटे प्रतिष्ठानों को छोड़कर अधिकांश प्रतिष्ठानों के शटर गिरे रहे। जिले के सभी पेट्रोल पंपों में ताला लटके होने के कारण दो पहिया वाहनों का परिचालन अन्य दिनों की अपेक्षा कम रहा। सार्वजनिक स्थलों ललित उरांव बस पड़ाव, कचहरी, प्रखंड कार्यालय, समाहरणालय समेत शहर के मुख्य मार्ग, मेन रोड, सिसई, थाना रोड, जशुपर रोड, लोहरदगा रोड आदि में सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि दोपहर के बाद शहर में हल्की चहल-पहल देखी गई। बंद को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा चौक-चौराहों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। इसी प्रकार जिले के अन्य प्रखंडों में भी बंद का असर देखा गया।

बिशुनपुर प्रतिनिधि के अनुसार नक्सली बंद के कारण माइंस क्षेत्रों में खनन ढुलाई का कार्य पूरी तरह बाधित रहा। ढुलाई कार्य में लगे सैकड़ों ट्रकों के पहिये रुके रहे। माइंस ट्रकों का परिचालन बंद होने के कारण ट्रकों खनन कार्य में लगे चालक, उप चालक मजदूरों के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न रही। इसके अलावा घाघरा, जारी, डुमरी, चैनपुर, रायडीह, पालकोट, कामडारा बसिया प्रखंड में भी बंद का असर देखा गया। बंद के कारण छोटे-मोटे चाय, पान खोमचे की दुकान तक बंद रही। इससे प्रखंडवासियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

बंद के दौरान बस पड़ाव में खड़ी बसें।