दीवारों पर चित्रकारी से बदल रही शहर की सूरत
कहींहिरण कुलांचे भर रहे हैं, तो कहीं कछु़ए और मछलियां पानी में अठखेलियां करती दिख रही हैं। कहीं मधुमक्खियां अपने छत्ते बनाने में व्यस्त हैं। पर्यावरण रक्षा का संदेश देते यह दृश्य किसी जैविक उद्यान का नहीं हैं। शहर के कुछ सरकारी भवनों की चहारदीवारी की रंगत इन दिनों बदली हुई नजर रही है।
परिसदन तथा जिला नियंत्रण कक्ष की चहारदीवारी पर कलाकारों द्वारा की जा रही सोहराई पेंटिंग हर किसी का मन मोह रही है। सड़क से गुजरने वाले सभी लोगों का ध्यान आकृष्ट करने वाली पेंटिंग को गुमला जिले के सिसई की संस्था स्तंभ से जुड़े लोग तैयार कर रहे हैं। कई मामलों में अलग हटकर काम करने की कोशिश करता दिख रहा प्रशासन इस संस्था से सरकारी भवनों की चहारदीवारी में कला-संस्कृति एवं जीवन की खुबसूरती से जुड़ी चित्रकारी करा रहा है। आमतौर पर विभिन्न कंपनियों के विज्ञापनों, पोस्टरों पान की पीक से सनी दिखाई देने वाली सरकारी भवनों की दीवारों से अलग हो रही इन दीवारों ने जहां जनता में सकारात्मक भाव पैदा किया है। वहीं शहर की तस्वीर भी बदल रही है। पेंटिंग कर रही संस्था की चेयरमैन जयश्री इंदवार ने बताया कि उनकी टीम ने मुख्यमंत्री के कार्यालय की बाहरी दीवारों को भी इसी तरह से सजाया है। वे सिमडेगा के डीसी आवास में भी जल्द ही अपनी कला दिखाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि झारक्राफ्ट से जुड़ी उनकी संस्था के द्वारा दर्जनों बेरोजगार युवक-युवतियों को पेंटिंग की कला से जोड़कर उन्हें रोजगार दिया है। साथ ही रंग की कीमत और पारिश्रमिक लेकर शहरों को सुंदर करने का अभियान चला रहे हैं।
दीवारों पर उकेरे गए मोहक चित्र।