आर्थिक स्थिति थी खराब पर नहीं टूटा मनोबल, लहराया परचम
पिताकी मौत के बाद बुरी तरह चरमरा गई परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद विकास ने हार नहीं मानी और खेल में राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र और अपना नाम रोशन कर रहा है। सिलंबम प्रतियोगिता में उसने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड, सिल्वर ब्रांच मेडल जीतकर जिले का परचम लहराया है।
करौंदी गांव निवासी विकास कुमार साहू ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे लेकिन अपनी हिम्मत नहीं हारी। वह जब दस वर्ष का था तभी उसके पिता वीर पटेल साहू का निधन हो गया। पैसे के अभाव में विकास की मां सुषमा देवी अपने पति का इलाज नहीं करा सकीं थीं।
पिता ही परिवार चलाते थे इसलिए उनकी मौत के बाद विकास के दो भाई-बहनों के समक्ष अंधकार छा गया। परिवार के लिए दो जून की रोटी की चिंता सताने लगी। परिवार चलाने के लिए विकास शहर के एक बर्तन दुकान में मजदूरी करने लगा। उससे होने वाली आय से वह घर चलाने में मां की मदद के साथ- साथ अपनी पढ़ाई पूरी करने लगा। इसी दौरान उसके चार दोस्तों पवन नाग, राहुल कुमार, रोहित कुमार पवन साहू से पता चला कि वे स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रशिक्षक जुन्नू रैन से खेलकूद का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके बाद विकास ने खेल को करियर बनाने के उद्देश्य से एकेडमी के सचिव जुन्नू रैन से मिलकर एकेडमी से जुड़ गया और वॉलीबॉल और सिलंबम पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान कई बाधा आई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अभ्यास करता रहा। एकेडमी के सचिव जुन्नू रैन ने भी हर संभव मदद की।
विकास ने गोड्डा में 8 से 10 जनवरी 2014 तक आयोजित विद्यालय स्तरीय सिलंबम प्रतियोगिता में गोल्ड, पटना में 16 से 19 फरवरी 2014 तक आयोजित प्रथम सीनियर सिलंबम राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड दिल्ली में 26 से 28 सितंबर 2014 तक आयोजित पांचवां सिलंबम राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुका है। रायपुर में 8 से 10 अगस्त 2014 तक आयोजित राष्ट्रीय जूनियर हैंड बॉल में सिल्वर मेडल, वर्ष 2015 में तामिलनाडू में आयोजित तृतीय राष्ट्रीय सिलंबम में ब्रॉच मेडल प्राप्त कर चुका है।
अबतक नहीं मिली कोई सरकारी मदद
विकासने कहा कि उसे आज तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। वह खेल को पूरी तरह करियर बना चुका है। खेल किट्स अन्य जरूरत की सामग्री मांगने पर एकेडमी के सचिव द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। उन्हीं की बदौलत वह आज इस मुकाम पर है। उसने कहा कि सरकार द्वारा नेशनल गेम्स के विजेताओं के लिए कैश अवार्ड स्कीम निकाला गया था। इसका आवेदन भरा था और 29 अगस्त को कैश अवार्ड मिलना था, लेकिन अब तक नहीं मिला।