सिमडेगा में जनजीवन अस्त-व्यस्त
बंद के कारण थम गए बसों के पहिए
माओवादियोंद्वारा सोमवार को आहूत बंद के कारण जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। वाहनों का परिचालन ठप रहा। दुकानें बंद रहीं। बंद को लेकर पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
नक्सल प्रभावित इलाकों में खास चौकसी बरती गई। बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। रोज कमाने खाने वाले मोटिया मजदूरों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बंद का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखा गया। ओडिशा छत्तीसगढ़ से आने वाली सभी छोटी-बड़ी वाहनों पर भी बंद का असर रहा। इधर रविवार को पीएलएफआई नक्सलियों द्वारा रविवार को बंद बुलाए जाने के कारण दो दिनों की नक्सली बंदी से जनता परेशान रहे। कोलेबिरा प्रखंड में बंद का व्यापक असर देखा गया। सड़कों पर सन्नाटा पसरा था। दुकानें बंद थीं। वाहनों का परिचालन ठप था। बानो प्रखंड में बंद असरदार रहा। बानो रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाली सभी ट्रेनें अपने निर्धारित समय से चली।
रेल पुलिस द्वारा बंद को लेकर खास चौकसी बरती गई। जलडेगा, ठेठईटांगर, बोलबा, केरसई कुरडेग प्रखंडों में बंद असरदार रहा। लोग बंद के कारण कहीं जा नहीं सके। परेशानियों का सामना करना पड़ा। बंद को लेकर पुलिस जवानों द्वारा खास चौकसी बरती गई। नक्सल प्रभावित कोलेबिरा घाटी केरेया घाटी में पुलिस जवान मुस्तैद रहे। बंद के दूसरे दिन जिले से अप्रिय घटना का समाचार नहीं है।
सिमडेगा : सड़क पर पसरा सन्नटा।
बंद में बंद पेट्रोल पंप।
बंद के कारण सुनसान रहा गुमला का मेन रोड।
झेलनी पड़ी परेशानी
घाघरा। नक्सलियों द्वारा घोषित दो दिवसीय बंदी के दूसरे दिन घाघरा में बंद असरदार रहा। सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानें बंद रही। बसों एवं सवारी वाहनों का परिचालन बंद रहा। इससे आने जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी हुई। वहीं बंद को लेकर बॉक्साइट ट्रकों का परिचालन भी बंद रहा। इससे लाखों रुपए राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।