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पाप स्वीकार कर मुक्ति पाने का समय है चालीसा

5 वर्ष पहले
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संतपात्रिक महागिरजाघर में बुधवार को पवित्र राख बुध पर्व के अवसर पर विशेष मिस्सा बलिदान अर्पित कर चालीसा की शुरुआत की गई।

इस मौके पर स्वामी बिशप पॉल लकड़ा ने अपने संदेश में कहा कि चालीसा बुराई का त्याग करने, सच्चाई के रास्ते पर चलने और पश्चाताप का समय होता है। चालीसा पाप से मुक्ति पाने और पाप स्वीकार करने का समय है। जिससे मन स्वच्छ और स्वस्थ होता है। उन्होंने कहा कि राख बुध के दिन लोग अपने माथे पर राख का विलेपन करते है।

यह इंगित करता है कि मनुष्य जब तक जीवित है, उसे प्रभु की उपासना करनी चाहिए क्योंकि अंत में उसी के पास जाना है। चालीसा काल में आध्यात्मिक नवीनीकरण पर विशेष बल दिया जाना है। विकर जनरल फादर सिप्रियन कुल्लू ने कहा कि हमें प्रभु यीशु के बताए हुए मार्गों पर चलना चाहिए।

प्रभु यीशु ने अपना जीवन लोगों की सेवा में बिता दिया। उन्होंने कहा कि राख बुध का पर्व ख्रीस्त धर्मावलंबी का पवित्र त्योहार है। इसके चालीस दिन के बाद ईस्टर का पवित्र त्योहार मनाया जाता है। इस मौके पर फादर रौशन केरकेट्टा, फादर राजेंद्र, अलबर्ट बाड़ा, नीलम एक्का फादर बरनाबस केरकेट्टा आदि मौजूद थे।

मिस्सा कराते पुरोहित

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