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30 दिन में सड़क हादसे में 16 लोगों की मौत

6 वर्ष पहले
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सड़क दुर्घटना में कब किसकी हुई मौत

दोजनवरी को कामडारा के मुर्गा टांड गाढ़ा नदी के पास बाइक के अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होने से बाइक सवार शशि विकास भेंगरा की मौत हो गई। छह जनवरी को भरनो के भड़गांव तेतरटोली के समीप ट्रक टाटा मैजिक की सीधी टक्कर में तीन लोग शेख मतिउर, सौरभ पासवान अरुण सिंह की मौत हो गई। वहीं आठ जनवरी को गुमला से तीन किमी दूर चंडाली के समीप बाइक ट्रैक्टर की टक्कर में बाइक सवार दो युवक संजय उरांव संतोष महतो की मौत हो गई। दस जनवरी को टोटो-बसुवा मार्ग पर टेंपो की चपेट में आने से 12 वर्षीय शाहिद अंसारी, 12 को भरनो के पारस नहर के पास दो बाइक की भिड़ंत में सूरज सिंह, 13 को सिसई के करकरी टाना स्कूल के समीप टेंपो-बाइक की टक्कर में बाइक सवार राजू साहू, 14 को घाघरा के नवडीहा के समीप ट्रक बाइक की भिड़ंत में बाइक सवार अमित उरांव घुडु उरांव, 22 को भरनो में मालवाहक ट्रक बाइक की टक्कर में बाइक सवार राजू उरांव, 27 को पालकोट के काली मंदिर के समीप टेंपो पलटने से महिला शनियारो मुंडाईन, 30 को शहर से छह किमी दूर खटवा नदी के पास सड़क दुर्घटना में बाइक सवार रोशन उरांव 31 जनवरी को चैनपुर के प्रेमनगर के समीप बाइक के धक्के से बाइक सवार वैशाखु रौतिया की मौत हो गई। इसी दिन भरनो के बोडो गांव के समीप ट्रक की चपेट में आने से गोवर्द्धन उरांव नामक युवक की मौत हुई।

टीन एजर्स करते हैं नियमों की अनदेखी

टीनएजर्स यातायात नियमों की अनदेखी कर तेज गति से वाहन चलाते हैं। कई युवा वाहन चलाते समय नशे में धूत रहते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। बगैर ड्राइविंग लाइसेंस और एक बाइक पर तीन लोग यात्रा करते हैं। लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए लगातार इसकी जांच नहीं की जाती है। वहीं बड़ी गाड़ियों में ओवरलोडिंग के कारण दुर्घटनाएं होती हैं।

गुडडू चौरसिया | गुमला

गुमलामें सड़क दुर्घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जिले में इस वर्ष जनवरी माह में 30 दिन में सड़क दुर्घटनाओं में 16 लोगों की मौत हो गई। वहीं 50 से अधिक लोग घायल हुए। इसके बावजूद लोग सजग हो रहे हैं, और ही प्रशासन कोई खास पहल कर रहा है। हालांकि पुलिस समय-समय पर वाहन चेकिंग अभियान चलाकर वाहनों की जांच करती है। कुछ दिन पूर्व ट्रैफिक सप्ताह के तहत प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को हेलमेट नहीं पहनने वाले दो पहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने का निर्देश दिया था। प्रशिक्षु आइएएस सूरज कुमार के नेतृत्व में अभियान चलाकर वाहनों के कागजात, ड्राइविंग लाइसेंस हेलमेट आदि की जांच की गई थी। लेकिन लगातार अभियान नहीं चलाए जाने के कारण हादसों पर रोक नहीं लग रहा है।