बादल छाए रहने से किसानों की चिंता बढ़ी
आसमान में बादल छाए रहने से आलू, दलहनी तेलहन फसलों (चना, अरहर, मसूर, सेम, सरसों आदि) की अच्छी पैदावार के प्रति किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसान राम रक्षेया सिंह, उदय सिंह, भोला राम, महेंद्र सिंह नरेश रविदास ने कहा कि चालू मौसम में दलहनी तेलहन फसलें लहलहाने लगी है। उनमें फुल लग गए हैं। आलू की फसल भी अच्छी है। पर इन दिनों पसरे इस वातावरण से इन पुसलों के प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। आसमान में धुंध भरा बादल नहीं हटे या बारिश नहीं हुई, तो कीड़े लाही के प्रकोप से दलहनी तेलहन फसल तथा अगित झुलसा रोग से आलू की पैदावार मारा जाएगा। खरीफ फसल के मारे जाने से आहत इन किसानों में चालू मौसम के इन फसलों के समक्ष उत्पन्न इस स्थिति को लेकर निराशा पैदा हो गई है।
कृषितकनीकी पदाधिकारियों ने लिया जायजा
प्रखंडकृषि तकनीकी सहायक तकनीकी प्रबंधक ने चालू मौसम के इन फसलों के नुकसान को लेकर उत्पन्न इस स्थिति का जायजा लिया है। बीटीएम संजय कुमार एटीएम प्रशांत तिवारी ने शनिवार को लपेया, सड़ेया, विलासपुर, कुकही, रामबांध समेत कई गांवों में इन फसलों का जायजा लिया और किसानों को चालू वातावरण के प्रभाव से इन फसलों के बचाव के लिए कीटनाशक के प्रयोग की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इमिडाइक्लोपिड 18.5 एसएल तीन एमएल दवा का 10 लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करना लाही कीड़ा से बचाव मे फायदेमंद होगा। जबकि आलू की फसल की अगित झुलसा रोग के प्रकोप से बचाने में मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लयू पी या कार्बेनडिजम 50 प्रतिशत डब्लयू पी प्लस मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यू पी 2-तीन ग्राम पाउडर का एक लीटर पानी में घोल बनाकर एक सप्ताह या एक पखवाड़ा के अंतराल में छिड़काव करना उपयोगी साबित होगा। इस पाउडर के घोल का छिड़काव तेज धूप निकलने के बीच किया जाना फायदेमंद होता है।
फोटो : 3 आसमान में छाये बादल का नजारा।