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मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, हराम हुई लोगों की रात की नींद

7 वर्ष पहले
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बदलतेमौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाने से लोगों की रात की नींद हराम हो गई है। शाम ढलते ही घरों में मच्छरों की भनभनाहट लोगों पर हमला शुरू हो जाता है। यह स्थिति लोगों की परेशानी का कारण बन गया है।

इस स्थिति के लिए लोग आस-पास के परिवेश में नालियों की सफाई डीडीटी के छिड़काव का नहीं होना बताते हैं। जिसकी जवाबदेही ग्राम स्वास्थ्य सह पोषण समिति को मिली है।

पड़ाहै पर्याप्त डीडीटी

अनुमंडलीयअस्पताल में मलेरिया के लैब तकनीशीयन माधव लाल ने कहा कि छिड़काव के लिए उनके यहां 200 से अधिक बोरा डीडीटी पड़ा है। स्वास्थ्य सहिया को इसका उठाव कर छिड़काव करने की जवाबदेही है। पर किसी सहिया ने अभी तक डीडीटी का उठाव नहीं किया है। विभागीय तौर पर अप्रैल-मई में डीडीटी छिड़काव का प्रावधान है। अभी मच्छरों का प्रकाेप बढ़ा है, तो डीडीटी का छिड़काव करना जरूरी है, जो उपलब्ध है।

नहींमिला है अंटायड फंड

सहियासाथी गीता मिश्रा, सीमा सिंह, रिंकू देवी अन्य सहिया का कहना है कि व्यय मद में अंटायड फंड चालू वर्ष में नहीं मिला है। समिति के निर्णय से सफाई अथवा स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी अन्य कार्यों में व्यय करने का प्रावधान है। राशि के अभाव में डीडीटी का उठाव छिड़काव करना मुश्किल है। बीटीटी गोपी रमन सिंह का कहना है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं होने से अंटायड फंड सहिया को प्राप्त नहीं हो सकता है।

मच्छरदानीकी बिक्री में इजाफा

मच्छरोंका प्रकाेप बढ़ने से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में मच्छरदानी की बिक्री में इजाफा हो गया। प्रतिष्ठानों में मच्छरदानी की नई खेप से खरीद बिक्री काे लेकर बढ़ती संख्या से भी मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाने का संकेत मिलता है। कलावती देवी, मनोहर राम, रामदेव पासवान, संजय सिंह अन्य कई ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की मच्छर भगाओं की व्यवस्था के भरोसे रहा नहीं जा सकता है। इसलिए मच्छरदानी को खरीद ले जाना जरुरत बन गया है।