संस्था ‘मौसम’ ने हिन्दी दिवस मनाया
हुसैनाबादके ब्लाॅक रोड स्थित सन शाइन प्ले स्कूल के प्रांगण में हिन्दी दिवस के अवसर पर साहित्यिक संस्था ‘मौसम’ के तत्वावधान में विचार गोष्ठी सह कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। अध्यक्षता स्कूल के अध्यक्ष डॉ. रामकिंकर सिन्हा एवं मंच-संचालन सक्सेस प्वाइंट के संचालक मो. नासिर ने किया।
मौके पर अध्यक्षता कर रहे डॉ. सिन्हा ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसा हिन्दी प्रेमी इतिहास में पन्नों में दूर-दूर तक कोई नहीं है। ‘सरोकार’ के अध्यक्ष वैद्य महेंद्र ठाकुर ने कहा कि आज हिन्दी नैतिक संसाधनों के घोर अभाव में अपना अस्तित्व खोती जा रही है जो कि चिंता का विषय है। वहीं कवियित्री मीनाक्षी चंद्रानी ने अपनी रचना ‘मां भारती का हृदय-हार है हिन्दी। साहित्य का सच्चा श्रृंगार है हिन्दी।’ द्वारा हिन्दी की महत्ता की झलकियां प्रस्तुत की।
साहित्यिक संस्था ‘मौसम’ के अध्यक्ष विनोद सागर ने कहा कि आज हिन्दी को सबसे ज्यादा खतरा उन चन्द हिन्दी साहित्यकारों से है, जिन्होंने हिन्दी साहित्य को गाली-गलौज एवं अश्लीलता का अखाड़ा समझ लिया है। तत्पश्चात् उन्होंने अपनी गजल ‘भारत में आकर अंग्रेजी दुल्हन हो गई। आज अपने ही घर में हिन्दी सौतन हो गई।’ एवं ’हिन्द के हिन्दी का ढेर सारा अवसाद आया। जैसे हिन्दी जगत में नया कोई फसाद आया। सोए थे अंग्रेजी चादर ओढ़कर कल तलक हम, जब हिन्दी दिवस आया तब यह याद आया।’ द्वारा हिन्दी की व्यथा को उजागर किया।
वहीं नवोदित कवयित्री आरती विपथगा ने अपनी रचना ‘जी उठी भारतीय संस्कृति, पुलकित हो रही मातृभाषा। सुबह की किरणें गढ़ रहीं, सफलता की नई परिभाषा।’ के द्वारा भारतीय संस्कृति की बानगी को प्रगट किया।
कवि डॉ. अल्ताफ हुसैन ने अपनी कविता ‘हिन्दी दीया और बाती है। अंग्रेजी मूंग दलता हिन्दी की छाती है’ से हिन्दी के आंतरिक महत्त्व को उजागर किया, वहीं बालमुकुंद भारती ने अपनी रचना ‘जनता से कईल वादा भूला गइले नेताजी। निर्धन के निवाला खा गइले नेताजी’को प्रस्तुत किया। कवि अखिलेश पासवान ने ‘हिन्दी को खोजूं कहां, मिलना बहुत कठिन हो गई है’नामक कविता पढ़ी।
कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा प्रो शीला सिन्हा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज कुमार प्रजापति, शिवकुमार विश्वकर्मा, अखिलेश पासवान, शिक्षिका प्रिया सिंह, आभा नंदनी, रीना पाठक, रंजना पाठक, अनुराधा एवं मुन्नी देवी आदि नाम उल्लेखन