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खासमहल से जादूगोड़ा तक अब सड़क होगी चौड़ी, डीपीआर तैयार

5 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज| जमशेदपुर/घाटशिला

खासमहलसे जादूगोड़ा तक की सड़क अब चिकनी और चौड़ी होगी। संभवत: अगले वित्तीय वर्ष में सड़क बननी शुरू हो जाएगी। इससे लगभग ढाई लाख की आबादी को फायदा मिलेगा। पथ निर्माण विभाग की प्रधान सचिव राजबाला वर्मा के निर्देश के बाद डीपीआर तैयार हो चुकी है। पथ निर्माण विभाग के केंद्रीय निरूपण संगठन (सीडीओ) को डीपीआर सौंप दी गई है। इस पर मुहर लगने का बाद सरकार के स्तर पर अंतिम स्वीकृति मिलेगी। खासमहल से जादूगोड़ा के बीच कई कस्बे बसे हैं। अर्ध शहरी क्षेत्र भी है। सड़क खासमहल, परसुडीह, शंकरपुर, सरजामदा, बारीगोड़ा, राहरगोड़ा, गदड़ा, गोविंदपुर, आसनबनी, राखा माइंस होते हुए जादूगोड़ा तक जाएगी। अभी सड़क की चौड़ाई महज 3 से 3.5 मीटर है। ग्रामीण कार्य विभाग ने एक साल पहले गोलपहाड़ी से गदड़ा तक सड़क बनाया है। अब अगल- बगल से सड़क और चौड़ी होगी। सांसद विद्युत वरण महतो जिला परिषद के उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह सड़क का निर्माण जल्द शुरू कराने के लिए कई बार सीएम से अनुरोध कर चुके हैं। जिन कस्बों से होकर प्रस्तावित सड़क गुजरने वाली हैं, वहां बड़ी संख्या में ठेका मजदूर रहते हैं। उन्हें आवागमन में काफी सहूलियत मिलेगी। सड़क अभी संकरी है। इस कारण लोगों को काफी परेशानी होती है। व्ययस्तम समय में लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। चौड़ीकरण होने के बाद वाहन चालकों को सुविधा होगी।

खास बातें

{पथनिर्माण विभाग की प्रधान सचिव के आदेश पर डीपीआर तैयार

{सड़क की चौड़ाई साढ़े पांच मीटर होगी

{आवागमन में होगी सहूलियत

^खासमहल से जादूगोड़ा तक सड़क की डीपीआर तैयार है। इसे सीडीआर में जमा करा दिया गया है। आबादी की दृष्टिकोण से यह सड़क काफी अहम है। अगले वित्तीय वर्ष में इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। ^संजय कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग

गोलपहाड़ी रंकिणी मंदिर जाने में होगी सुविधा: धार्मिकदृष्टिकोण से भी यह सड़क काफी अहम है। खासमहल के नजदीक गोलपहाड़ी मंदिर है, तो दूसरी ओर जादूगोड़ा के नजदीक रंकिणी मंदिर। दोनों की बहुत मान्यता है। दोनों जगहों पर रोजाना भीड़ जुटती है। सड़क बनने के बाद गोलपहाड़ी या रंकिणी मंदिर जाने में लोगों को सुविधा होगी, विशेष कर महिलाओं को। यात्री गाड़ियों का भी परिचालन अधिक होगा। अभी संकरी सड़क होने के कारण ऑटो रिक्शा और छोटी गाड़ियां ही अधिक चलती हैं।

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