पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जादूगोड़ा और नरवा में पर्यटन की असीम संभावनाएं

जादूगोड़ा और नरवा में पर्यटन की असीम संभावनाएं

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इकोटूरिज्म एक्सपो मंगलवार को मिलानी सभागार में शुरू हुआ। यह बुधवार को भी चलेगा। पर्यटन विभाग, यूसिल समेत कई संगठनों के साझा आयोजन का उदघाटन यूसील के सीएमडी दिवाकर आचार्या ने किया। उन्होंने कहा कि जादूगोड़ा से नरवा पहाड़ की दूरी महज दस किमी है। वहां की प्राकृतिक छटा ऐसी कि उसे देख कोई भी कवि हो जाए। यहां पर्यटन के लिए अनगिनत संभावनाएं हैं। बस देश दुनिया के लोगों को दिखाने और बताने की जरूरत है। दिवाकर आचार्या ने कहा कि यूसिल का मेघालय में प्रोजेक्ट चल रहा है। वहां बहुत पर्यटक जाते हैं। झारखंड में भी प्रकृति ने बहुत उपहार दिया है। पर्यटन के विकास के लिए आधारभूत संरचना बेहतर होनी चाहिए। इस दिशा में कुछ काम हो रहे हैं। विधि व्यवस्था के मसले पर नकारात्मक भाव जरूर है। इस मसले पर देश के लोगों की सोच सही करनी होगी। अगर पर्यटकों का आना शुरू हुआ, तो रोजगार के अवसर सृजित होंगे। और भी लाभ होगा। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता वीर सिंह सुरीन ने भी विचार रखे। अध्यक्षता वरुण बारिक दा ने की।

{ कीताडीह की युवतियों ने हो समाज का वह पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया, जो शादी विवाह के अवसर पर किया जाता है।

{ पोटका प्रखंड के शंकरदा गांव के कलाकारों ने छऊ नृत्य प्रस्तुत किया। और भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए।

{ कई पर्यटन एजेंसी ने स्टॉल लगाया, जो झारखंड में पर्यटकों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने पर जानकारी देती रही।

{ गांवों में बिना रासायनिक खाद के उपजने वाली सब्जियों की गुणवत्ता को देखने खरीदने का लोगों को मौका मिला।

{ इको टूरिज्म एक्सपो के आगंतुकों को पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

दलमा में रोपवे बनना चाहिए : सुरेश

सिंहभूमचैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सुरेश सोंथालिया ने कहा कि ऐसी धारणा कि प्रमुख पर्यटन स्थल नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में हैं। पर्यटकों का आगमन शुरू होगा, तो उन इलाकों के बेरोजगार को काम करने से फुर्सत नहीं मिलेगी। दलमा में रोपवे बनना चाहिए। ऐसा हुआ, तो वह देश के श्रेष्ठ पर्यटन स्थल में एक होगा। इटली, जर्मनी समेत कई देशों से लोग छऊ नृत्य सीखने यहां आते हैं। झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर को भी पर्यटन से जोड़ने की जरूरत है।

खबरें और भी हैं...