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सभी जिले आइएपी में शामिल होंगे : डीजीपी

7 वर्ष पहले
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> नक्सल प्रभावित इलाकों का होगा चहुंमुखी विकास

> डीजीपी ने किया मोहनपुर जैप-5 में कैंटीन का उद्घाटन

भास्करन्यूज|देवघर

झारखंडका हर जिला नक्सल प्रभावित हो चुका है। यह रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजी जा चुकी है। लेकिन फिलहाल झारखंड के 24 में से सिर्फ 17 जिलों को ही आइएपी (इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान) में शामिल किया गया है। लेकिन अब शेष बचे 7 जिलों को आइएपी में शामिल करने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए झारखंड सरकार ने केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। जबकि केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष भी रांची दौरा के क्रम में प्रस्ताव रखा गया है। जिसमें देवघर, दुमका, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ सहित अन्य जिले शामिल है। इस योजना के तहत आइएपी में शामिल जिलों के विकास के लिए करोड़ों रुपए केन्द्र सरकार से सीधे नक्सल प्रभावित जिलों को दी जाती है। जिससे जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में रोड, पुल, पुलिया, तालाब, कूप, चेकडैम आदि का निर्माण कराया जाता है। इससे सिर्फ पिछड़े इलाकों का विकास होता है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलती है। केन्द्र सरकार की यह योजना नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। लिहाजा झारखंड के शेष 7 जिलों को आइएपी में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को रिपोर्ट भेज दी गई है। ये बातें झारखंड के डीजीपी राजीव कुमार ने कही। उनके साथ में एडीजीपी केएन चौबे भी मौजूद थे। गुरुवार को देवघर बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद वे परिसदन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। आइएपी में शामिल होने के बाद नक्सलियों से सामना के लिए राज्य को हर तरह की सुविधाएं मिलती है।

राज्यका यह 8 कैंटीन जवानों को समर्पित|जिस तरहसेंट्रल के जवानों के लिए रोजमर्रा के सामानों की खरीदी को लेकर विभिन्न जिलों में कैंटीन चलाई जा रही है। वह सुविधा अब झारखंड पुलिस के जवानों को भी मिलेगी।

जान जोखिम में डालकर राज्य की सेवा करने वाले इन जवानों के लिए हर जिलों में कैंटीन की सुविधा दी जाएगी। ताकि जवान रोजमर्रा की गुणवत्तायुक्त सामान कम कीमत पर खरीद सके। तय कार्यक्रम के तहत गुरुवार को देवघर पहुंचे डीजीपी ने मोहनपुर चौपा मोड़ स्थित जैप-5 पहुंचे। जहां उन्होंने सब्सिडी सेंट्रल पुलिस कैंटीन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का यह 8वां कैंटीन है। झारखंड पुलिस के जवानों