- Hindi News
- पत्थर से हाथी को उकसाने वाले पर होगी कार्रवाई
पत्थर से हाथी को उकसाने वाले पर होगी कार्रवाई
ग्रामीणक्षेत्रों में हाथी या अन्य वन्य जीव आने पर वन विभाग भले ही सूचना पाकर पहुंचे या पहुंचे। लेकिन घटना के अगले दिन समाचार पत्रों में छपी खबरों के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश में वन विभाग कोई मौका नहीं चुकना चाहती है। जामताड़ा वन प्रक्षेत्र के वनपाल राजेश्वर पासवान ने गत 6 दिसंबर शनिवार को गोरायनाला और ढेकीपाड़ा में जंगली हाथी को पत्थर मारने के सिलसिले में मिहिजाम थाने से कार्रवाई करने को आवेदन दिया है।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में घटना के दिन हाथी आने की सूचना वन विभाग को दी गई थी। लेकिन वन विभाग कर्मी ने सुध लेना उचित नहीं समझा। वहीं घटना के अगले दिन 7 दिसंबर को पुलिस से कार्रवाई के बाबत आवेदन दिया गया है। आवेदन में वनपाल ने लिखा है कि एक मध्यम वर्ग का नर जंगली हाथी गोरायनाला क्षेत्र से गुजर रहा था। जिसे लोगों ने पत्थर से मारा है। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 भाग 1 के तहत हाथी वन्य प्राणी है। वहां पहुंचने पर देखा गया कि कई लोग हाथी को पत्थर से मार रहे थे। रोकने का प्रयास किया गया तो लोग उन्हें धक्का देकर हाथी को मार रहे थे।
थाना को चिह्नित कर कार्रवाई करने के लिए वन विभाग ने दिया आवेदन हाथी को पत्थर प्रहार में गंभीर चोट भी आई है। हाथी जान बचाने के लिए रास्ता खोज रहा था। लेकिन लोगों ने उसे चारों ओर से घेर कर पत्थर से वार किया है जो वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 32, 51 का सरासर उल्लंघन है और गैर जमानतीय संज्ञेय अपराध है। अनुसूची 1 में जंगली हाथी वर्गीकृत है इसलिए अपराध की गंभीरता और भी बढ़ जाती है। इस बाबत पुलिस से अपील की गई है कि स्थानीय मीडिया कर्मियों की मदद से हाथी को पत्थर मारने वाले लोगों की पहचान कर कठोर एवं सख्त कार्रवाई की जाए। उल्लेख्य है कि पत्थर मारने से हाथी उत्तेजित भी हो सकता था। उसकी जानमाल को नुकसान भी हो सकता था। हाथी को घेरें मारे नहीं उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।