खतरा यहां खातरा, देवघर है देवधर
आज हिन्दी दिवस है। जिले के सार्वजनिक स्थलों पर हिन्दी की अशुद्धि का अवलोकन शनिवार को दैनिक भास्कर की टीम ने किया। इस दौरान टीम ने सरकारी संस्थाओं, रेलवे, बैंक सहित कई अन्य संस्थानों पर हिन्दी की दुर्दशा देखने को मिली। जिसे टीम ने अपने कैमरे में कैद कर पाठकों के समक्ष रखने का प्रयास किया है। जिले के विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में दी गई सार्वजनिक जानकारी में कई तरह की गलतियां है। सरकार एक ओर जहां हिन्दी दिवस मनाकर जागरूकता पैदा करने का प्रयास कर रही है वहीं दूसरी ओर शब्दों के अपभ्रंश से लोगों को आहत करने के साथ-साथ अर्थ का भी अनर्थ निकाल रहे हैं। ऐसे में हिन्दी का विकास कैसे संभव हो सकता है। यह आज मंथन करने की आवश्यकता है। केवल हिन्दी दिवस की औपचारिकता बनाकर ही क्या इसे हम दूर कर सकते हैं। टीम ने पाया कि भाषाई और शाब्दिक अशुद्धियां कई स्थानों पर थी। पुरानी योजनाओं के बोर्ड में कई स्थानों पर गलतियां है। जबकि स्टेट बैंक जामताड़ा की मुख्य शाखा ने तो धार्मिक शहर देवघर को देवधर बनाकर रख दिया है। महीनों से इस पट्ट पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। इसके अलावे बैंक में कई प्रकार की भाषाई अशुद्धियां देखने को मिली है। रेलवे ने तो सभी हद पार कर दिया। खतरा को खातरा बना दिया और सूची को सुची बनाकर रख दिया है। वहीं दूसरी ओर जिले के आंचलिक क्षेत्र में हिन्दी और भी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और दौर से गुजरती नजर रही है। नाला प्रतिनिधि के अनुसार हर साल की तरह इस बार रविवार को हिन्दी दिवस मनाने को लेकर क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह है। विशेषकर समाज के शिक्षित, समाज सेवी, विद्यार्थी एवं बुद्धिजीवियों में इस दिवस को लेकर गर्व है। भारत देश की राष्ट्रीय भाषा हिन्दी और समारोह आयोजन करने के मामले में समाज सक्रिय नहीं है। इसे पर्व का रूप देकर अगर संपूर्ण समाज के लोग शामिल होते तो हिन्दी के प्रति अपनापन ओर भी अधिक बढ़ता।
आज भी हिंदी का नहीं हुआ पूर्ण विस्तार
यह बात दीगर है कि अब भी समाज के संपूर्ण क्षेत्र में हिन्दी भाषा का विस्तार नहीं हो सका है तथा गैर सरकारी संस्थान तो दूर सरकारी कार्यालय और इससे संबंधित गतिविधियों में भी हिन्दी भाषा की असंपूर्णता अंकित होने लगी है। उदाहरणस्वरूप सरकार द्वारा सूचना अधिकार कानून के बारे में लगाए गए होर्डिंग में पारर्दशिता को अंकित किया गया है। जबकि प्रख