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बांग्ला पत्रिका की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी 14 को
नाला | झारखंडअलग राज्य बनने के 14 साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी यहां के बांग्ला भाषियों को अब भी सार्वजनिक तौर पर मातृभाषा का उपयोग करने में कठिनाई होती है। गौरतलब है कि स्कूल में बांग्ला भाषा के शिक्षक की कमी रहने के कारण इस भाषा के बच्चे अन्य भाषा की ओर मुखातिब होने लगे हैं। वहीं घर परिवार में बांग्ला बोलनेवाले लोग हिंदी अखबार पढ़कर ही अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और बंगाली समाज के वैसे बुद्धिजीवियों के द्वारा काफी धीमी गति से किए जा रहे प्रयास कारण समुदाय की व्यथा यथावत बनी हुई है। इतना ही नहीं बांग्ला भाषा और प्राचीन संस्कृति की रक्षा के लिए गठित समितियां भी गतिशीलता से दूर है। इस दूरी को पाटने के लिए जामताड़ा जिला से प्रकाशित बांग्ला पत्रिका झारखंड ज्योति का पहल कुछ हद तक सराहनीय है। उक्त कथन नाला क्षेत्र के विजन कुमार राय, तीर्थमय मंडल, तापस भट्टाचार्य, दामोदर झा, जीवन कुमार मंडल, श्यामापद मंडल आदि बांग्ला भाषी लोगों के बीच अक्सर चर्चा में है। इस संदर्भ में झारखंड राज्य स्तरीय पत्र पत्रिका प्रदर्शनी सह आलोचना सभा के लिए 14 फरवरी को रेडक्राॅस भवन जामताड़ा में एक कार्यक्रम रखा गया है। इस आशय की जानकारी देते हुए स्थानीय साहित्यकार पिंटु कुमार ने कहा है कि बांग्ला भाषा को पुर्नजीवित रखने तथा समुदाय को बांग्ला के मुख्यधारा के साथ जोड़कर रखने के लिए इस तरह का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम में जामताड़ा जिला के अलावा निकटवर्ती जिले से भी बांग्ला प्रेमी कवि, साहित्यिक, लेखक एवं भाषाविद भाग लेंगे।