- Hindi News
- प्रत्याशी रिझाने में तो वोटर दुहने में व्यस्त
प्रत्याशी रिझाने में तो वोटर दुहने में व्यस्त
मतदानकी पूर्व रात यहां रातभर चांदी की चमक बिखेरी गई। प्रत्याशी मतदाता को रिझाने में लगे थे तो मतदाता प्रत्याशियों के दोहन में कोई कसर बाकी नहीं रखी। टोली बनाकर कई लोग बारी-बारी से कई उम्मीदवारों के दरवाजे पर दस्तक देते नजर आए। इसमें आधी आबादी भी किसी से कम नहीं के तर्ज पर मैदान में देर रात तक डटी रही। लोकतंत्र के महापर्व में अर्थ वितरण में किसी का नाम उजागर करना अपराध माना जाता है, कोई भी किसी से कम कहलाने को तैयार नहीं था। क्षमता जैसी रही उन्होंने दिलेरी से गड्डी उड़ाई। होली, दीवाली आैर ईद तो हर साल होते हैं, पर लोकतंत्र का महापर्व 5 सालों में एक बार ही आता है।
छापामारी से बचने के लिए इजाद किए नए तरीके
एंबुलेंसकेवल आपातकाल चिकित्सा के लिए उपयोग में लाई जाती है। पर राजनीति के बाजीगरों ने एंबुलेंस को भी यहां राजनीति के लिए बेझिझक इस्तेमाल किया। उड़नदस्ता के छापामारी से बचने के लिए राजनीति के बाजीगरों ने एक नई राह तलाश ली। अब तक रोगियों के लिए इस्तेमाल की जाती रही एंबुलेंस को राजनीति के बाजीगरों ने नोट ढोने का जरिया बना दिया। सूत्र ने बताया कि जमुआ विधानसभा क्षेत्र में एक प्रत्याशी ने यह अजीबोगरीब नुस्खा आजमाया। जानकारी के अनुसार गड्डी रख ऊपर से नकली रोगी को सुला दिया गया।
प्रत्याशियों के िलए कयामत की रात
रविवारको चौथे चरण का मतदान होगा, पर इससे एक रात पूर्व सड़क छाप मतदाताओं के लिए चांद की रात होती है तो प्रत्याशियों के लिए कयामत की रात। रात के एक या दो बजे किसके दरवाजे पर दस्तक होगी और आने वाला नोटों की थैली थमा जाएगा किसी को मालूम नहीं है। सड़क छाप मतदाताओं वोट के ठेकेदारों को जितनी तड़प नोटों की थैली की रहती है, उससे अधिक नोट बांटने वाले को अपनी थैली खाली करने की चिंता रात भर सताती है। उन्हें अच्छी समझ होती है कि जीत के बाद काम तो करना नहीं फिर इस चुनाव की कीमत तो इसी चुनाव में चुकानी होगी।