वित्तीयवर्ष 2005-06 मे
गवेंद्र मिश्रा . 9608469168
फंडके अभाव में भवन प्रमंडल की चार महत्वपूर्ण योजनाएं पांच वर्षों से अधूरी पड़ी हुई हैं। इनमें से हर योजना पर भवन निर्माण विभाग 4 करोड़ रुपए से खर्च कर चुका है। अब विभाग के पास पैसा नहीं है कि वह योजनाओं को पूरा कर सके। स्थिति यह हो गई है कि विभाग के अफसरों को योजनाओं की याद तक नहीं है। निर्माण शुरू होने के समय विभाग की ये सबसे महत्वपूर्ण योजनाएं मानी जा रही थीं, लेकिन आज इनकी सुध लेनेवाला कोई नहीं है। बीआईटी स्थित आईटी भवन, जोड़ापोखर स्थित सीएचसी भवन, मेगा स्पोर्ट्
वित्तीयवर्ष 2005-06 में बीआईटी सिंदरी के कैंपस में भवन प्रमंडल ने आईटी भवन का शुरू किया था। करीब 4 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी भवन को पूरा नहीं किया जा सका। योजना की डीपीआर में इसका बजट 4 करोड़ रुपए रखा गया था। सरकार ने योजना को पारित करते हुए 4 करोड़ रुपए विभाग को दे दिए, लेकिन पूरे रुपए सिर्फ भवन बनाने में खर्च कर दिए गए और फिनिशिंग का काम बाकी रह गया। भवन बिना इस्तेमाल के वर्षों तक पड़ा रहा और जर्जर हाे गया। विभाग के अफसर कहते हैं कि याेजना को पूरा करने के लिए सरकार से और फंड मांगा गया है, पर मिल नहीं रहा है।
केस2
झरियाअंचल के लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने वहां 4 करोड़ रुपए की लागत से वित्तीय वर्ष 2007-08 में सामुदायिक चिकित्सा केंद्र का भवन बनवाया। भवन प्रमंडल ने भवन बना दिया, पर स्वास्थ्य विभाग ने यह कहते हुए उसका उपयोग नहीं किया कि उसे इस संबंध में सरकार से कोई लिखित सूचना नहीं दी गई है कि जोड़ापोखर में सीएचसी के लिए किसी भवन का निर्माण कराया गया है। दो विभागों के पेंच में जनता के करोड़ों रुपयों से बना भवन बर्बाद होता जा रहा है। आज उस भवन में खिड़कियां बची हैं और दरवाजे, चोर सब उखाड़ ले गए।
केस3
शहरके हीरक रोड में वित्तीय वर्ष 2010-11 में 4.83 करोड़ रुपए की लागत से मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण शुरू किया गया था। आज चार साल बाद भी यह अधूरा पड़ा हुआ है। काफी समय से काम बंद है। भवन निर्माण विभाग के अफसर कहते हैं कि फंड खत्म हो गया है और कॉम्प्लेक्स को पूरा करने के लिए अतिरिक्त 2 करोड़ रुपए की जरूरत है। अफसर कह रहे हैं कि सरकार से 2 करोड़ रुपए की मांग की गई है, लेकिन फंड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। विभाग के अफसरों के मुताबिक, फंड के लिए उपायुक्त के स्तर से खेल विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है।
जर्जर हो चुका जन सूचना भवन।
अधूरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
फंड के लिए कई बार भेजा गया है प्रस्ताव
बड़े सवाल.....
{अफसरोंने किस तरह डीपीआर तैयार की कि योजना पूरी होने से पहले ही फंड खत्म हो गया?
{ जब योजना को पूरा करने के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं थी, उसे उसे शुरू ही क्यों किया गया?
{ राशि खत्म होते ही तुरंत फंड क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया, ताकि काम रुके?
अस्पताल बना, स्टेडियम और फंड खत्म
लापरवाह अफसरशाही | 4-4 करोड़ रुपए की चार योजनाओं की घटिया डीपीआर बनाईं और अब उन्हें भूल भी गए