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संस्कार, सत्संग अनुशासन से होगा समाज सुसंस्कृत : आचार्य जयदेव

5 वर्ष पहले
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मनुष्यजन्म लिया है तो मानव धर्म का पालन करें। श्रीरामचरितमानस में सांसारिक रिश्तों की मर्यादा स्थापित की गई है। बड़े-छोटे के साथ यथोचित व्यवहार करना चाहिए तभी समाज और परिवार में सुख शांति बनी रहती है। उक्त बातें आचार्य श्री जयदेव श्रोत्रीय ने शनिवार को श्रीहनुमानगढ़ी बनियाहीर मैदान में श्रीरामकथा प्रवचन के दौरान कही।

आचार्य श्री श्रीहनुमानगढ़ी मंदिर के 22वें वार्षिक समारोह पर आयोजित श्रीहनुमत महायज्ञ सह श्रीरामकथा प्रवचन में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। अपने कथा के दौरान कहा कि समाज में व्याप्त व्यभिचार और भ्रष्टाचार को दूर करना है तो संस्कार, सत्संग और अनुशासन का पालन करना होगा। माता-पिता, अभिभावक अपने बच्चों में ये गुण प्रारंभ से डालें तो उनका समुचित विकास संभव है।

इससे पूर्व दिन भर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान होते रहे। प्रात: मंगला आरती के साथ वेद पाठ किया गया। परायणाचार्य अशोक तिवारी ने मानस पाठ किया। यज्ञाचार्य शशिकांत तिवारी के निर्देशन में हवन यज्ञ आदि हुए। पूरे दिन यज्ञमंडप की परिक्रमा करने को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। संध्या में श्रीराम राज्याभिषेक कार्यक्रम हुआ। जय श्रीराम, हर हर महादेव और वीर बजरंगी के जयघोष से पूरा बनियाहीर हनुमानगढ़ी क्षेत्र अनु गूंजित हो रहा था। सैकड़ों की संख्या में श्रीराम भक्तों ने प्रभु का प्रसाद ग्रहण किया।

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