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शव रख लोगों ने किया 3 घंटे झरिया-सिंदरी मुख्य रोड जाम

7 वर्ष पहले
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जोड़ापोखरथाना क्षेत्र के भागा मोड़ स्थित झरिया-सिंदरी मुख्य मार्ग पर मंगलवार को लोगों ने शव रखकर 3 घंटे तक जाम कर दिया। जाम के दौरान लोगों का आक्रोश जोड़ापोखर थाना के विरूद्रुध था। जोड़ापोखर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोग आरोपी के साथ पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगा रहे थे। सड़क जाम रहने से सड़क के दोनों और वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। व्यस्ततम समय होने के कारण वाहनों की संख्या काफी बढ़ गई थी। मौके पर जोड़ापोखर पुलिस मामले को शांत करने पहुंची। लेकिन लोगों का विरोध देख पुलिस मौके पर से लौट गई। आक्रोशित लोग मौके पर सिंदरी डीएसपी को बुलाने की मांग कर रहे थे। मौके पर सिंदरी डीएसपी पहुंचे। लोगों से वार्ता की। आश्वासन दिया आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। तब जाकर लोग माने और शव को हटाया और सड़क जाम समाप्त किया।

अपराधियोंकी पिटाई से रंजीत की स्थिति हुई थी खराब|मृतक भागानिवासी रंजीत कुमार गुप्ता (28) ननबैंकिंग कंपनी विज्योर में अपने भाई संजय कुमार गुप्ता के लिए कलेक्शन का काम करता था। संजय उक्त कंपनी में एजेंट का काम करता है। सात सितम्बर को कलेक्शन कर जामाडोबा की ओर से अपने घर की ओर लौट रहा था। उसी दौरान जामाडोबा रेलवे क्रासिंग के समीप कुछ लोगों ने उसे घेर लिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी। पिटाई के दौरान रंजीत के सिर, छाती, गर्दन मंे गंभीर चोटें आईं। पिटाई के बाद रंजीत से 5500 रुपए की छिनतई भी कर ली। तब तक आस पास के लोग जुटने लगे। मौका देखकर पिटाई करने वाले अपराधी वहां से भाग निकले। वहां से रंजीत किसी तरह घर पहुंचा और अपने भाई संजय के साथ जोड़ापोखर थाना पहुंचा और मामले की जानकारी देते हुए जामाडोबा आजाद नगर निवासी सुगीरम राम पर मारपीट छिनतई का आरोप लगाया।

इस संबंध में सिंदरी डीएसपी रामाशंकर सिंह का कहना था कि मामले की विस्तृत जानकारी ली गई है। उक्त घटना में पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा। जो भी आरोपी हैं उस पर कार्रवाई की जाएगी।

रंजीत गुप्ता की मौत के बाद उसकी मां मालती देवी और भाई संजय गुप्ता की स्थिति रो-रो कर खराब हो रही थी। मां मालती देवी बार-बार एक ही बात कह रही थी कि आज जितिया के दिन ही भगवान ने उसके बेटे को उससे छीन लिया। इस बात को जो भी सुनता उसकी आंखे नम हो जा रही थी।

पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा

जितिया के दिन ही भगवान ने छीन लिया बेटे को

नर्सिंग होम से चिकित्सक