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श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारूणम, नव कंज...

5 वर्ष पहले
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श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय …के साथ श्रीराम जय राम जय जय राम के महामंत्र से झरिया बनियाहीर का क्षेत्र बुधवार को अनु गूंजित हो रहा था। श्रीश्री हनुमत महायज्ञ के दूसरे दिन भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे। यज्ञाचार्य शशिकांत तिवारी ने यजुर्वेद का पाठ किया। परायणाचार्य पंडित ने श्रीरामचरित मानस के पाठ किए। दिन में दस बजे से यज्ञ मंडप में यज्ञ भगवान की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। श्रीराम और श्री हनुमत प्रभु का स्मरण करते हुए सैकड़ों महिला, पुरुष और बुजुर्गों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। वैदिक मंत्रोच्चारण से क्षेत्र धर्ममय हो रहा था। अपराह्न में भी श्रीरामचरित मानस पाठ किए गए। संध्या के समय भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने श्रीराम कथा प्रवचन का आनंद लिया।

प्रभु की भक्ति के लिए करें अहंकार का त्याग

श्रीरामकथावाचक महाराज आचार्य जयदेव श्रोत्रीय ने भक्तों को श्रीराम कथा सुनाई। पंडितों के दल ने श्रीगणेश वंदना की। श्रीहनुमान चालीसा के पाठ के बाद श्रीरामकथा प्रारंभ हुआ। आचार्य श्री ने प्रभु वंदना की। ऋषि याज्ञवल्क्य और भारद्वाज मुनि के प्रसंग का वर्णन किया। कहा कि श्रीराम कथा के लिए अहंकार और दंभ को त्यागना पड़ता है। जिसने श्रीराम के शरणों में शीश झुकाया उसी को प्रभु का सानिध्य मिला है। प्रभु से लगाव रखें और दु:खों से छुटकारा पाएं। श्रीराम कथा के मनोहारी वर्णन पर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम के आयोजन में श्री हनुमानगढ़ी सेवा समिति के कार्यकर्ता और स्थानीय भक्त सेवाभाव के साथ लगे थे। संध्या में घंटे और शंख ध्वनि के साथ सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भगवान की आरती में सम्मिलित हुए। भक्तों ने प्रभु का प्रसाद ग्रहण किया।

आचार्य श्रीजयदेव श्रोत्रियजी प्रवचन करते।

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