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तिलकुट की सौंधी खुशबू से महक रहा है कतरास
तिलकुट तैयार करते गया के कारीगर।
मकर संक्राति में है तिलकुट का विशेष महत्व
मकरसंक्राति के त्योहार में तिलकुट का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सुबह में स्नान ध्यान कर तिलकुट का सेवन करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भी मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान को तिलकुट का भोग लगाया जाता है। भोग लगाने के बाद श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
जांचपरख कर खरीदें तिलकुट| जानकारोंके अनुसार तिलकुट की खरीदारी जांच परख कर करनी चाहिए। इन दिनों तिलकुट मंे कई प्रकार की मिलावट भी की जा रही है। मिलावट वाले तिलकुट के सेवन से कई प्रकार की बीमारियों की संभावना है। इधर शहर के दुकानदार भी अपने प्रतिष्ठान में शुद्ध तिलकुट बेचने का दावा कर रहे हैं। कई दुकानदार तो गया के रमन्ना गली से कारीगर बुलाने की बात कहते हैं।
ध्यान देने योग्य बात ये है कि गया के प्रसिद्ध रमन्ना गली में बेहतरीन किस्म का तिलकुट कारीगरों द्वारा तैयार किया जाता है। इस तिलकुट की मांग बिहार समेत कई राज्यों में है। इसलिए कोयलांचल के कई तिलकुट दुकानदार गया से कारीगर मंगवाकर तिलकुट तैयार करवाते हैं।
> शहर में सज गई हैं दुकानें, खरीदार भी खिंचे रहे हैं
डीबीस्टार . कतरास
पौषमाह पड़ने के पूर्व ही कतरास शहर तिलकुट की सौंधी सौंधी खुशबू से महक उठा है। बिहार के गया जिले से तिलकुट बनाने के लिए कारीगर यहां पहुंच गए हैं और विभिन्न स्थानों पर अपना काम भी शुरू कर दिए हैं। कारीगरों द्वारा तिलकुट बनाने के साथ ही बाजारों में भी तिलकुट की दुकानें सज गई हैं। शहर के बस स्टैंड से लेकर कतरी नदी तक विभिन्न दुकानों में चूड़ा, गुड़, तिलकुट, रेवड़ी समेत तिल के सामानों को बिक्री के लिए लगाया गया है। ग्राहक भी तिलकुट की सौंधी सौंधी खुशबू से दौड़े चले रहे हैं। ग्राहकों ने बताया कि मकर संक्रांति का कौन करे इंतजार इसका आनंद अभी से ही उठाना चाहिए।