केटीपीएस ने दी जिले को नई पहचान
डीवीसी की कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन ने झारखंड की सबसे बड़ी विद्युत परियोजना होने का गौरव हासिल कर लिया है। इसके दोनों यूनिटों से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। इस परियोजना की दोनों यूनिटों की विद्युत उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट है। हालांकि अभी स्थायी एैशपॉड की समस्या आड़े रही है, लेकिन इस समस्या का शीघ्र निष्पादन होने की उम्मीद है। केटीपीएस में विद्युत उत्पादन शुरू होने से क्षेत्र के विकास का द्वार खुल गया है।
इस परियोजना से जहां विद्युत समस्या दूर होगी, वहीं विकास की गति बढ़ने की संभावना बन गई है। लगभग 1800 एकड़ में बसे इस विशाल परियोजना की परिधि से 100 मीटर चौड़ा हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना शामिल है। डीवीसी प्रबंधन अस्पताल, स्कूल और हाईटेक कॉलोनी बनाने की तैयारी में भी है। वहीं 10 किलोमीटर की परिधि में बसे गांवों तक बिजली और सड़क पहुंचाने की भी योजना है। इससे क्षेत्र के कई गांवों में विकास की रोशनी फैलेगी। इस परियोजना से कई अन्य इलाका भी रौशन होगा।
केटीपीएस से क्षेत्र को एक नई पहचान मिली है। इससे जुड़े कई उद्योग धंधे भी विकसित होने की आस बढ़ी है। परियोजना अंतर्गत निर्मित चौड़ी सड़कें भी क्षेत्र की विकास गाथा का बयां कर रही है। डीवीसी परियोजना के अंतर्गत कई नामी-गिरामी निर्माण कंपनियां लोगों को रोजगार मुहैया भी करा रहा है।
ट्रांसपोर्ट कार्य को भी गति मिली है। केटीपीएस की चकाचौंध वाली रोशनी का दीदार करने बाहर से लोग आते रहे हैं।
विद्युत परियोजनाओं से कोडरमा पावर हब बनने की आेर अग्रसर
विद्युत परियोजनाओं से कोडरमा पावर हब बनने की आेर अग्रसर है। डीवीसी का 1000 मेगावाट क्षमता वाले केटीपीएस बनकर तैयार है। यहां से बिजली उत्पादन शुरू है। जबकि डीवीसी का पनबिजली परियोजना पहले से ही कार्यरत है। डीवीसी डैम से पनबिजली तैयार होती रही है। इससे क्षेत्र को विद्युत सुविधा का लाभ मिला है। केटीपीएस से बिल्कुल निकट कोडरमा और हजारीबाग जिले के इलाके में 4000 मेगावाट क्षमता वाले तिलैया मेगा पावर प्रोजेक्ट का निर्माण की योजना है। इसको लेकर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल गया है। भारत सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना से दूर-दूर तक बिजली भेजना संभव हो सकेगा।
फोटो13कोडपी 6 में बांझेडीह पावर प्लांट की तस्वीर,