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आदेश से बढ़ी आईटीडीए की मुश्किलें

6 वर्ष पहले
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विशेषकेंद्रीय सहायता के तहत जनजातीय किसानों को कृषि यंत्र देने में अंतर राशि लेने का मामला गरमा गया है। एक ओर जहां जिला अनुश्रवण समिति ने मामले में आईटीडीए निदेशक को किसानों से ली गई राशि वापस कराने का आदेश दिया है, वहीं राज्य आदिवासी सहकारी विकास निगम द्वारा पूर्व में जारी आदेश से डीआरडीए की मुश्किल बढ़ गई है।

झारखंड राज्य आदिवासी सहकारी विकास निगम लिमिटेड द्वारा विशेष केंद्रीय सहायता के तहत चयनित किसानों के बीच आधुनिक कृषि उपकरणों का वितरण किया गया था। योजना के तहत चयनित जनजातीय किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर कृषि उपकरण देने की बात जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कही गई थी। लेकिन उपकरणों के वितरण के दौरान किसानों से अतिरिक्त राशि लिए जाने पर सवाल खड़े हुए थे। मामला जिला अनुश्रवण समिति की गत दिन हुई बैठक में उठा था और समिति ने किसानों से ली गई अंतर राशि वापस कराने का आदेश आईटीडीए निदेशक को दिया है। यह आदेश अब आईटीडीए विभाग के लिए परेशानी का सबब बन गया है।

एक ओर जहां अनुश्रवण समिति के आदेश के अनुपालन की बात है वहीं दूसरी ओर झारखंड राज्य आदिवासी सहकारी विकास निगम लिमिटेड के सचिव का वह पत्र जिसमें आपूर्तिकर्ताओं को किसानाें से अंतर राशि लेने की बात कही गई है। अब विभाग उहापोह में है और इस मामले में आईटीडीए निदेशक रामसागर ने विभागीय सचिव को पत्र लिखा है। गौरतलब है कि विशेष केंद्रीय सहायता के तहत जनजातीय किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर महंगे कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाने की योजना में ग्राम पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों द्वारा भाई भतीजावाद करने को लेकर योजना पहले ही चर्चा में है।

^किसानों को पैसा लौटाने के बारे जिला अनुश्रवण समिति से मिले आदेश के बारे विभागीय सचिव से पत्राचार किया जा रहा है। किसानों से पैसा विभागीय निर्देश पर लिया गया था। किसानों का चयन ग्राम पंचायत के माध्यम से कराया गया है। इसमें विभाग की कोई भूमिका नहीं है।\\\'\\\' रामसागर, निदेशक आईटीडीए सिमडेगा

जलडेगा की प्रमुख ने उठाया था मामला

जलडेगाकी प्रमुख कोंगाड़ी एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने सांसद कड़िया मुंडा की अध्यक्षता वाली जिला अनुश्रवण समिति की बैठक में शिकायत की थी कि शत प्रतिशत अनुदान की योजना में पावर टीलर, पैडी ट्रांसप्लांटर, शीड ड्रील रोटावेटर आदि की आपूर्ति में किसानों से भारी राशि वसूली गई है। जबकि लाभुक चयन के समय उन्हें बताया गया था कि योजना शत प्रतिशत अनुदान की है। पांच फरवरी को हुई अनुश्रवण समिति की बैठक में चयनित किसानों को पैडी ट्रांसप्लांटर देने में एक लाख 13 हजार, पावर टीलर देने में साढ़े आठ हजार तथा रोटावेटर में आठ हजार 272 रुपए लिए जाने की शिकायत की गई थी। इसके बाद आईटीडीए निदेशक को आदेश दिया गया था कि किसानों से ली गई अतिरिक्त राशि को सप्लायरों से वापस कराएं।

सप्लाई ऑर्डर में है अंतर राशि लेने का जिक्र

योजनामें लाभुक किसानों से अंतर राशि लेने का सीधा निर्देश विभाग को प्राप्त नहीं हुआ था। झारखंड राज्य आदिवासी सहकारी विकास निगम लिमिटेड ने आपूर्तिकर्ताओं को दिए आदेश में लिखा था कि वे अलग-अलग उपकरणों के लिए अलग-अलग अंतर राशि लाभुक से परियोजना निदेशक आईटीडीए सिमडेगा के माध्यम से प्राप्त करें। पैडी ट्रांसप्लांटर के लिए स्वीकृत दर तीन लाख 58 हजार 50 रुपए का उल्लेख आपूर्ति आदेश में करते हुए इसके विरुद्ध निगम द्वारा दो लाख 45 हजार रुपए का भुगतान करने तथा अंतर राशि लाभुक से लेने की बात कही गई थी। इसी तरह रोटावेटर, पावर टीलर शीड ड्रील आदि उपकरणों के लिए भी किसानों से ली जाने वाली अंतर राशि का उल्लेख सप्लायरों को दिए गए आपूर्ति आदेश में किया गया था।

करीबीलोगों को लाभ देने का लग चुका है आरोप

जनजातीयकिसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर कृषि उपकरण देने की योजना पहले से विवादों में है। कुरडेग, केरसई तथा जलडेगा में योजना के तहत लाभुक चयन में जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने करीबी लोगों रिश्तेदारों का चयन करने का आरोप जोरशोर से लग चुका है। कुरडेग में उक्त मामला उपकरणों के वितरण के क्रम में भी उठा था। केरसई में जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने रिश्तेदारों के माध्यम से कृषि उपकरणों के लिए किसानों से अवैध राशि लेने का आरोप भी लगा है।

143किसानों को दिए गए हैं महंगे कृषि उपकरण

योजनाके तहत जिले के 12 किसानों को तीन लाख 58 हजार रुपए मूल्य वाला पैडी ट्रांसप्लांटर, 12 किसानों को एक लाख 45 हजार लागत का पावर टीलर, 12 किसानों को 52 हजार रुपए कीमत वाला पीटी ऑपरेटेड शीड ड्रील, सात किसानों को एक लाख 47 हजार 680 रुपए मूल्य वाला पावर टीलर, 16 किसानों को 93 हजार 272 रुपए मूल्य वाला रोटावेटर तथा 84 किसानों को 18 हजार 332 रुपए मूल्य वाला पंपसेट प्रदान किया गया है।