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नहीं चली गाड़ियां, बंद रहीं दुकानें

7 वर्ष पहले
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बंद से सिमडेगा में भी थमे रहे वाहनों के पहिये

पीएलएफआई के बंद से जनजीवन रहा अस्त-व्यस्त, माओवादियों का बंद आज

>बंद के कारण प्रभावित रहा आम जनजीवन

भास्करन्यूज | सिमडेगा

पीएलएफआईनक्सलियों द्वारा रविवार को बुलाए गए बंद के कारण जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। वाहनों का परिचालन ठप रहा। दुकानें बंद रहीं। बंद को लेकर पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। नक्सल प्रभावित इलाकों में खास चौकसी बरती गई। बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। रोज कमाने खाने वाले मोटिया मजदूरों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बंद का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखा गया।

ओडिशा छत्तीसगढ़ से आने वाली सभी छोटी-बड़ी गाड़ियों पर भी बंद का असर रहा। इधर सोमवार को माओवादियों द्वारा बंद बुलाए जाने के कारण दो दिनों की नक्सली बंदी से जनता परेशान है। कोलेबिरा प्रखंड में भी बंद को लेकर सड़कों पर सन्नाटा पसरा था। दुकानें बंद रही। बानो प्रखंड में बंद असरदार रहा। बानो रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाली सभी ट्रेनें अपने निर्धारित समय से चली। रेल पुलिस द्वारा बंद को लेकर खास चौकसी बरती गई।

जलडेगा, ठेठईटांगर, बोलबा, केरसई कुरडेग प्रखंडों में बंद असरदार रहा। लोग बंद के कारण कहीं जा नहीं सके। परेशानियों का सामना करना पड़ा। बंद को लेकर पुलिस जवानों द्वारा खास चौकसी बरती गई। नक्सल प्रभावित कोलेबिरा घाटी केरेया घाटी में पुलिस जवान मुस्तैद रहे। बंद के पहले दिन जिले से अप्रिय घटना का समाचार नहीं है।

बंद काे लेकर बस पड़ाव में खड़ी बसें।

>सड़कों पर पसरा रहा सन्नाटा

भास्करन्यूज | गुमला

पीएलएफआईद्वारा रविवार को आहूत बंद से शहरी ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। शहर के ललित उरांव बस पड़ाव से एक भी यात्री बसें नहीं खुलीं। शहर की सभी दुकानें बंद रहीं। यात्री बसें नहीं चलने के कारण सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों को कहीं भी आने-जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं इक्का-दुक्का टेंपो निजी वाहनों का शहर में परिचालन हुआ। टेंपो चालकों ने लोगों से मनमाना किराया वसूल किया। शहर की दुकानें बंद रहने के कारण मेन रोड में सन्नाटा पसरा रहा। बंद के कारण खासकर मजदूर वर्ग के लोगों को रोजगार नहीं मिल सका। इधर बंद को लेकर जिला प्रशासन काफी मुस्तैद रहा। पुलिस बल शहर