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हिंदी को बनाएं वैश्विक भाषा : कुमार वीरेंद्र

7 वर्ष पहले
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भारतीयस्टेट बैंक के क्षेत्रीय व्यवसाय कार्यालय में हिन्दी राजभाषा मास के समापन समारोह के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में एनपी विवि के हिन्दी के प्रो. कुमार वीरेंद्र ने कहा कि हिन्दी को समृद्ध बनाने की पहल स्वयं शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रति जवाबदेह बनने की जरूरत है।

हिंदी को सरल सुलभ बनाकर ही इसे जन-जन की भाषा बनाई जा सकती है। हिन्दी हमारे देश की संपर्क भाषा है। दूसरे भाषाओं को जानना समझना भी जरूरी है। किंतु हिन्दी प्रयाेग ज्यादा हो इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर हिंदी को संपर्क भाषा बनाने के लिए पहल की जानी चाहिए ताकि हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बन सके। क्षेत्रीय प्रबंधक मनीष वक्शी ने कहा कि हिन्दी के प्रति बैंक कर्मियों का रुझान बढ़ा है। अब बैंक में भी ज्यादा काम हिन्दी में निबटाए जा रहे हैं। हिन्दी के सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए गए हैं। बैंक की कोशिश है कि कर्मी ज्यादा से ज्यादा काम हिन्दी में करें। उन्होंने कहा कि पूरे एक माह तक कई प्रतियोगिताओं में बैंक के पदाधिकारी बेहतर प्रदर्शन किए हैं। मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में पत्रकार राणा अरूण सिंह, सतीश सुमन संजीव नयन ने भी अपने विचार रखे।

इस मौके पर शब्दावली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान दिलीप वर्मा, द्वितीय स्थान अविनाश चंद्रा तृतीय स्थान पंकज वर्मा को मिला। जबकि इस कैटेगरी में सांत्वना पुरस्कार रामप्रवेश शर्मा को मिला। पत्र लेखन प्रतियोगिता में नरेंद्र कुमार सिन्हा को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।

दिलीप वर्मा द्वितीय रामप्रवेश शर्मा तृतीय स्थान पर रहें। टिप्पणी लेखन में दिलीप वर्मा प्रथम , तरुण कुमार कुंडू द्वितीय विमल कुमार निधि को तृतीय स्थान मिला। कार्यक्रम का संचालन मुख्य प्रबंधक प्रशासन एनके झा धन्यवाद ज्ञापन मुख्य प्रबंधक ग्रामीण सतीश कुमार ने किया।

कार्यक्रम के दौरान बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक मनीष बक्शी अन्य अधिकारी मुख्य अतिथि कुमार वीरेंद्र विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित करते।