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संसाधन नहीं, शिक्षक देते हैं बच्चों को ज्ञान : खगेंद्र
मेदिनीनगर | बच्चोंको शिक्षा का ज्ञान उनके शिक्षक देते हैं। बेंच, डेस्क या कंप्यूटर नहीं। बेशक संसाधन इस कार्य में सहयोगी साबित होते हैं। लेकिन यह कतई नहीं है कि संशाधन ही बच्चों को शिक्षा देते हैं। यह बात आरडीडीई खगेंद्र कुमार ने कही। वे जिला स्कूल के 139 वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर बोल रहे थे। आरडीडीई ने कहा कि वार्षिकोत्सव वह मौका है जब हम अपने पुराने समय का भी अवलोकन करते हैं। हम यह समझने का प्रयास करते हैं कि हम आगे कहां जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्कूल को कभी शिक्षा जगत का मानक समझा जाता था। आज हमें इस बात पर गौर करना होगा कि बदलते समय में कैसे उस स्थिति को वापस लाया जाए।
आरडीडीई ने कहा कि असल में वार्षिकोत्सव एक परंपरा है। जो हमेे आगे की राह भी दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों और अध्यापकों में यह विश्वास पैदा करने की जरूरत है कि जिला स्कूल आज भी वही है। आरडीडीई ने कहा कि स्कूल में बच्चों को सीखने का अवसर मिले। शिक्षा देने का मतलब कतई पढ़ाना नहीं होना चाहिए। इसके पहले आरडीडीई डीईओ रतन कुमार महावर ने दीप प्रज्जवलित कर काय्रक्रम की शुरूआत की। डे बोर्डिंग की छात्राओं ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। प्राचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह ने स्कूल का प्रतिवेदन पढ़ा। जिसमें उन्होंने स्कूल के लिए शिक्षक संसाधन की जरूरत बतायी। कार्यक्रम का संचालन दामोदर उपाध्याय ने किया। वार्षिकोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सच्चिदानंद मिश्र, राजेंद्र प्रसाद सिंह, सुष्मित सिंह, निर्मल प्रसाद, मुकेश दीक्षित, रामदयाल कुशवाहा, हीरा सिंह, नौशाद अहमद, संजय त्रिपाठी, प्रमोद पांडेय आदि उपस्थित थे।
करेंनाम रोशन
डीईओरतन कुमार महावर ने कहा कि बच्चे जिला स्कूल का नाम आगे भी रोशन करें, हमारी यही शुभकामना है। उन्होंने कहा कि बच्चे ही हमे गर्व करने का मौका दे सकते हैं। उनका बेहतर पॉरफार्मेंस ही उनका स्थान तय करेगा। इसलिए बच्चे लगन के साथ पढ़े और अपनी प्रतिभा का परचम लहराएं।