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शारदीय नवरात्र आज से माता के स्वागत में जुटे भक्त
सर्वशक्तिएवं संपन्नता की अराध्य देवी मां दुर्गा के पूजनोत्सव को लेकर भक्तों ने तैयारी तेज कर दी है। गुरुवार से प्रारंभ हो रहे शारदीय नवरात्र पर कलश स्थापना कर पूजा अर्चना की तैयारी श्रद्धालु आयोजकों द्वारा की जा रही है। इस अवसर पर माता के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा एवं उपवास व्रत भक्तों द्वारा की जा रही है। शारदीय नवरात्र को लेकर गुरुवार को कलश स्थापना होगी। प्रात:काल से लेकर दोपहर 12.37 बजे तक प्रतिपदा तिथि हस्त नक्षत्र है। इसलिए 12.37 बजे तक ही कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद दूज यानी द्वितीया हो जाएगी। पंडित डॉ सुधीर कुमार झा के अनुसार, प्रतिपदा तिथि में ही कलश स्थापना करनी चाहिए। पहले दिन कलश स्थापना के साथ प्रथम शैल पुत्री का दर्शन-पूजन प्रतिष्ठा होगी।
कलशमें सभी देवताओं का वास
माताके कलश में मां के अलावा सभी देवताओं का वास होता है। मुख में विष्णु, कंठ में रुद्र यानी महादेव, मूल में ब्रह्मा, बीच में सभी सागर नदियां, ऊपरी भाग में सातों द्वीप, चारों वेद और कलश के अन्य अंगों में बाकी सभी देवताओं का वास होता है।
राशिवार फलाफल
{मेष,धनु,कन्या : मध्यम {मिथुन,तुला, कुंभ : नेष्ट {वृष, मकर, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मीन : श्रेष्ठ
शैल पुत्री की पूजा आज
मिहिजाम|बुधवारकोपितृ विसर्जन के साथ ही पितृपक्ष का समापन हो गया। अपने पितरों का तर्पण करने वालों ने आज पवित्र जलाशयों पर जमा होकर तर्पण किया। दूसरी ओर आज अमावस्या के अवसर पर विभिन्न काली मंदिरों में पूजा अर्चना की गयी। लोगों ने शारदीय नवरात्र के लिए नहाय खाय के नियमों को पूरा किया। अपने घर प्रतिष्ठानों की साफ सफाई, रंग रोगन, सजावट आदि में लोग व्यस्त रहे। गुरूवार को कलश स्थापन के साथ शारदीय नवरात्र का पर्व शुरू हो जायेगा। विशेष कर पूजन सामग्रियों की दुकानों और फल की दुकानों पर नवरात्र व्रती की भीड़ देखी गयी। नवरात्र को लेकर दुर्गासप्तशती की पुस्तकों की मांग भी काफी रही। व्रत करने वाले लोगों ने पुस्तक की भी खूब खरीदारी की। गुरूवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ही देवी प्रथम स्वरूप शैल पुत्री की पूजा आराधना की जायेगी। जबकि शुक्रवार को द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाएगी। या देवी सर्वभूतेषु, शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।
कलश स्थापना लग्न के अनुसार
इस तरह करें