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इतिहासविद रामचंद्रगुहा, जब बीसीसीआई में शामिल किए गए, तो कई

4 वर्ष पहले
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इतिहासविद रामचंद्रगुहा, जब बीसीसीआई में शामिल किए गए, तो कई लोगों को लगा कि ‘इंडिया आफ्टर गांधी’ लिखने वाले इतिहासविद को शामिल किया गया, तो जरूर कुछ खास होगा। क्योंकि जितनी महारत रामचंद्र की इतिहास पर है, उतनी ही क्रिकेट, पर्यावरण, आदिवासियों पर है। वे इन विषयों पर कई पुस्तकें लिख चुके हैं। ‘ए कॉर्नर ऑफ फॉरेन फील्ड, इंडियन हिस्ट्री और ब्रिटिश स्पोर्ट्स’ में वे क्रिकेट के दीवानों को तो अपना मुरीद बना ही चुके थे, साथ ही उन्होंने दलितों के उत्थान की भी बात कही थी। जिसका किरदार बालू पालवनकर थे, जो दलित होने के कारण भारतीय टीम का कैप्टन नहीं बन सकते थे, जबकि वह गजब के बॉलर थे। बाद में जब गांधीजी के दौर में बालू के भाई विट्‌ठल को टीम का नेतृत्व करने का मौका मिला। पालवनकर पहला दलित परिवार था, जो क्रिकेट खेला। गुहा ने स्पिनर बालू का किरदार पुस्तक के लिए इसलिए भी चुना, क्योंकि कभी खुद भी स्पिन बॉलिंग किया करते थे।

देहरादून में जन्मे गुहा के पिता फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में डायरेक्टर थे और मां हाईस्कूल में टीचर। शुरू से ही घर में वातावरण अच्छा था। रामचंद्र दून स्कूल में पढ़े, और दून स्कूल वीकली के संपादक भी रहे।

मूल रूप से रामचंद्र तमिल हैं। उनके पिता का नाम सुब्रमण्यम रामदास गुहा था। यहां गुहा से तात्पर्य राम-सीता को गंगा पार कराने वाले निषादराज गुहा से था। इससे उनके बंगाली होने का अहसास होता था। पिता के नाम के अनुसार इनका नाम सुब्रह्मण्यम रामचंद्र होना था, लेकिन टीचर उन्हें बंगाली समझ रामचंद्र गुहा कहने लगे। तब से नाम यही है। जबकि गुहा इनका सरनेम नहीं है। रामचंद्र ने ग्राफिक डिजाइनर सुजाता केशवन से विवाह किया। दो बच्चे हैं। बेटे का नाम उसके नाना के नाम पर केशव धनंजय रखा है, और बेटी इड़ावती हैं।

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