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लालू से बात हुई, तब जाकर मंत्रीजी काे ठंडक मिली...

4 वर्ष पहले
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मंत्री सरयूराय के बारे में यह कहा जाता है कि वे हर काम सीना ठोंककर करते हैं। पड़ोसी राज्य भी जाते हैं, तो लालू से मेलमिलाप करते हैं। इसके असर के बारे में जरा भी नहीं सोचते। लालू भी बाहें फैलाकर स्वागत सत्कार करते हैं। यह जानते हुए भी कि आज जो चारा गले की फांस बना हुआ है, उसे सबके परोसने में सरयू ही सूत्रधार थे। मगर पिछले कई दिनों से सरयू के ही एक साथी मंत्री की सेहत थोड़ी नरम थी। पता चला कि ये भी लालू के पुराने मुरीद हैं, पर राजनीतिक विवशता के कारण उनसे मिल नहीं पा रहे थे। सोचते रहते थे कि कभी जिनकी छत्रछाया में राजनीति करते थे। उनसे आज मिल भी नहीं पा रहे। वह भी तब, जब लालू आए दिन राजधानी पधार रहे हैं। या फिर ‘पेश’ हो रहे हैं। अगर मिले तो पार्टी वाले पीछे ही पड़ जाएंगे। खैर तभी मंत्रीजी को एक रास्ता सूझा। एक दिन मंत्रीजी के हालचाल जानने के लिए लालू पार्टी के पासवानजी पहुंचे। मंत्रीजी ने तुरंत उन्हें अपनी पीड़ा बताई। कहा कि आप अपने ही मोबाइल पर लालू से बात करा दीजिए। पासवानजी ने भी बिना देर किए उनकी बात करा दी। तब जाकर मंत्रीजी के कलेजे को ठंडक पड़ी। {खबरची

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