कृषि विभाग की सुस्ती से मंत्रीजी हुए नाराज
कृषिविभाग की ओर से नाला प्रखंड में 200 हेक्टेयर में फलदार पौधा लगाना था लेकिन आठ माह में विभाग सिर्फ गड्ढ़ा हीं खोद पाया है। वहीं सहकारिता पदाधिकारी को अब तक पता नहीं है कि कितने केंद्र पर धान क्रय किया जा रहा है। लेकिन 70 लाख रुपए मूल्य के धान खरीदी का दावा कर रहे हैं। जिसका जन प्रतिनिधियों ने विरोध किया है। साथ हीं गेंहू के बीज वितरण में गड़बड़ी की शिकायत भी की गई। मौका था जिला योजना समिति की बैठक का। समाहरणालय सभागार में प्रभारी मंत्री अमर बाउरी की अध्यक्षता में शनिवार को आहूत बैठक में जिप सदस्य ने इस मामले को गंभीरता से उठाया। वहीं बैठक में अनुपस्थित रहने के कारण पशुपालन पदाधिकारी और डीएफओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
शिक्षकों की पर जताई गई चिंता
वहींशिक्षा विभाग के समीक्षा के क्रम में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। इस संदर्भ में जिला शिक्षा अधीक्षक ने यूनिट के हिसाब से शिक्षक की नियुक्ति किए जाने की बात कही। इस अवसर पर पशुपालन विभाग की समीक्षा नहीं हो सकी। विभाग की ओर से कोई भी अधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुए। अलबत्ता नाला विधायक रवींद्रनाथ महतो ने 12 पशु चिकित्सालय में एक भी चिकित्सक नहीं रहने की बात कही। साथ हीं वन विभाग के पदाधिकारी भी बैठक में शामिल नहीं हुए। इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए दोनों विभाग के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया।
किसानों को नहीं मिल रहा धान क्रय का लाभ
वहींधान क्रय केंद्र के संदर्भ जैसे हीं चर्चा शुरू हुई जिप सदस्यों ने एक साथ किसानों को इसका लाभ नहीं दिए जाने की बात कही। इस संदर्भ में जिला सहकारिता पदाधिकारी ने 21 केंद्र संचालित होने का दावा किया। साथ हीं राशि की कमी की भी बात कही है। पूछे जाने पर डीसीओ ने आवंटित 70 लाख की राशि का धान क्रय किए जाने का दावा किया है। जब मंत्री ने केंद्रों का नाम पूछा तो एक दर्जन केंद्र का नाम भी नहीं बता पाए। वहीं लैंपस के माध्यम से 1790 क्विंटल गेंहू बीज के वितरण में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया। नाला विधायक और सांसद प्रतिनिधि ने किसानों तक बीज नहीं पहुंचने की बात कही। इस संदर्भ में मंत्री ने डीसी विशेष रूप से समीक्षा करने और जिला सहकारिता पदाधिकारी काे प्रखंडवार लैंपस और लाभुकों की सूची एवं प्रति लाभुक हुए वितरण का प्रतिवेदन एक सप्ताह के अंदर भेजने का निर्देश दिया है।
वहीं खनन विभाग की समीक्षा के क्रम में बालू का मुद्दा छाया रहा है। बालू के अवैध उत्खनन से लेकर वैकल्पिक व्यवस्था पर चर्चा की गई। बालू के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए समिति ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत वैसे बालू घाट जिनका पर्यावरण क्लियरेंश नहीं है वहां से सरकारी और निजी उपयोग में डबल रॉयाल्टी लेकर बालू का उठाव किए जाने का निर्देश दिया गया। साथ हीं प्रभारी मंत्री ने वैकल्पिक व्यवस्था में पारदर्शिता रखने की बात कही है। वहीं जिले में निर्माणाधीन सड़कों में कहीं भी योजना से संबंधित बोर्ड नहीं लगाने का मुद्दा जिप सउस्य ने उठाया। मामले पर संज्ञान लेते हुए मंत्री अमर बाउरी ने योजना की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। साथ हीं भू-अर्जन से संबंधित मामले में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा जिन लाभुकों को भू-अर्जन की राशि नहीं मिली है वैसे मामले का त्वरित निष्पादन का निर्देश दिया है। इंदिरा आवास की समीक्षा के दौरान उपलब्ध रिपोर्ट पर मंत्री ने नाराजगी जाहिर की और मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त को जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। समीक्षा के क्रम में बताया गया कि वर्ष 2011 से 2015 तक 3198 स्कीम लंबित है जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 1268 स्वीकृत स्कीम में से एक भी पूर्ण नहीं हुई है। इस बावत बताया गया कि सरकार की ओर से राशि आवंटित नहीं होने की वजह से योजना पूर्ण नहीं हो सका है।
योजना समिति की बैठक में समीक्षा के क्रम में कृषि विभाग की धीमी गति पर प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जाहिर की और काम में तेजी लाने का निर्देश दिया। कृषि पदाधिकारी ने एनजीओ का चयन नहीं होने की बात कहीं जिसका सांसद प्रतिनिधि ने विरोध किया। विदित हो कि अगस्त माह में हुई बैठक में नाला क्षेत्र में 200 हेक्टेयर भूमि पर फलदार वृक्ष लगाने का प्रस्ताव पारित हुआ था लेकिन 7 माह बाद हुई समीक्षा के क्रम में पाया गया कि अब तक कृषि विभाग सिर्फ गड्ढ़ा हीं खोद पाई है।
शनिवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित डीपीसी की बैठक में गैर सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। बैठक में जिला स्तरीय पदाधिकारी के अलावा सांसद, विधायक, जिप अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और नगर परिषद के अध्यक्ष की उपस्थिति अनिवार्य थी। लेकिन जिला परिषद के कुछ सदस्य के परिजन बतौर प्रतिनिधि बनकर बैठक में शामिल होना चाहा जिसका विरोध किए जाने पर उन्हें सभागार से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
वन और पशुपालन विभाग के पदाधिकारी से मांगा स्पष्टीकरण
मंतबैठक में हिस्सा लेते मंत्री अन्य पदाधिकारी।
बैठक में हिस्सा लेते जिला योजना समिति के अध्यक्ष।