जांच कार्रवाई, बढ़ती जा रही है मनरेगा में घोटालेबाजों की मनमानी
5.20 लाख की लूट के लिए वर्ष भर पानी वाले जोरिया में बना दिया तालाब
महात्मागांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना (मनरेगा) गरीबों के लिए केंद्र सरकार की खास योजना है। लेकिन जिला के रोजगार सेवक, पंचायत सचिव इसे अपनी मनमानी से चला रहे हैं। इस समय जिला के मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों के मन में जो रहा है वही, इस योजना के लिए भेजे गए फंड के साथ किया जा रहा है। आलम यह है कि कहीं बिना कार्य किए ही राशि की निकासी कर ली जा रही है तो कहीं मजदूरों की मजदूरी भी हड़प ली गई है। जांच में इस बात का खुलासा होने के बाद भी प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती है। जिस कारण मनरेगा से जुड़े कर्मियों का मनोबल भी बढता जाता है।
मामला : कुरूवागांव में वर्ष 1990-91 में जल है जहान है योजना के तहत कूप का निर्माण किया गया था। उक्त कूप का व्यास 15 फीट था कूप को पत्थर से बांधा गया था। समय के साथ कूप धंसता गया। इसी बीच गांव निवासी स्व मुस्लिम मियां के पुत्र असाद अंसारी ने मनरेगा से कूप निर्माण के लिए आवेदन दिया। आवेदन के बाद प्रशासन द्वारा मनरेगा के तहत कूप निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। स्वीकृत कार्य की योजना संख्या 07/2014-15 है। इस स्वीकृति के बाद तो सहायक अभियंता और ही कनीय अभियंता ने ही कार्य स्थल की जांच की और घर बैठे ही एमबी बूक कर दिया था। सभी ने मिलकर पुराने कूप की मरम्मत कर नए कूप का स्वरूप दे दिया और 2 लाख 36 हजार 198 रुपए की निकासी कर ली थी।
करमाटांड़ प्रखंड क्षेत्र में जोरिया में तालाब बना दिया गया है। प्रखंड क्षेत्र के डुमरिया पंचायत के डुमरिया गांव में मनरेगा की संचालित योजना के नाम पर सरकारी राशि की बंदरबांट कर ली गई है। इस निर्माण कार्य में मनरेगा के नियमों की जमकर अनदेखी की गई है। यहां लापरवाही का यह आलम है कि जिस जोरिया में तालाब का निर्माण कराया गया है वहां पूर्व से ही एक तालाब है। इस संबंध में बीडीओ भी कहते हैं कि जोरिया में अथवा उसके बगल में तालाब बनाना गलत है। यह तालाब पांच लाख रुपए की लागत से बना है। जानकारी के अनुसार डुमरिया के नीचे निवासी मोबीन अंसारी के नाम से यह तालाब 5 लाख 19 हजार 700 रुपए की लागत से बनाने की स्वीकृति दी गई थी। इसका योजना संख्या 32/14-15 है। इस संबंध में ग्रामीण बताते हैं कि जिस स्थान पर तालाब का निर्माण कराया गया है उस स्थान से सटा हुआ एक जोरिया है। उक्त जोरिया में वर्ष भर पानी रहता है। बावजूद इसके सरकारी राशि के बंदरबांट के उद्देश्य से उक्त तालाब का निर्माण की स्वीकृति दी गई तथा निर्माण कार्य कराया गया। तालाब निर्माण के समय तालाब के एक छोर पर गार्डवाल बीच जोरिया में बना दिया गया है। जिस कारण पानी के तेज बहाव के कारण नवनिर्मित तालाब का गार्डवाल की मिट्टी कटकर जोरिया में बह रहा है। इस कारण यह भी आशंका है कि पूरी गार्डवाल की मिट्टी पानी में पूरी तरह से बह जाएगी। इस निर्माण कार्य में रोजगार सेवक, पंचायत सेवक, मुखिया, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता तथा कार्यपालक अभियंता की मिलीभगत है। ग्रामीण बताते हैं कि योजना चयन के लिए सरजमीन पर तो ग्राम का सभा का आयोजन किया गया है और ही पदाधिकारियों द्वारा कार्य का निरीक्षण ही किया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव के रोजगार सेवक को विगत पांच वर्ष से एक ही स्थान पर रखा गया है। इस संबंध में संबंधित रोजगार सेवक ने कहा कि तालाब का प्लाट नंबर और जोरिया का प्लाट नंबर अलग है। जल्द ही अनियमितता को सुधार लिया जाएगा। इस मामले में बीडीओ करमाटांड़ प्रभाकर मिर्धा ने कहा कि जोरिया में तथा उसके आसपास तालाब का निर्माण कराना नियम विरुद्ध है। यदि ऐसा हुआ है तो जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
इससे पूर्व में करमाटांड़ प्रखंड में पुराने कूप की मरम्मत कर, नए कूप का नाम दे दिया गया और ढाई लाख रुपए की निकासी कर लिया गया था। यह कार्य करमाटांड़ प्रखंड के कुरूवा गांव में किया गया था। राशि का बंदरबांट सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक लाभुक ने मिलकर कर लिया था। मामला उजागर होने पर डीसी जामताड़ा ने घपला करनेवाले के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। निर्देश के बाद बीडीओ प्रभाकर मिर्धा ने प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
ऐसा ही एक मामला नाला प्रखंड के टेसजोड़िया पंचायत के चुनकुदर गांव में हुआ है। गांव के लाभुक कृष्णा मरांडी को 42 हजार 413 रुपए का भुगतान नहीं किया गया। भुगतान के लिए लाभुक ने शिकायत की। शिकायत के बाद अपर समाहर्ता विधानचंद्र चौधरी ने मामले की जांच की। जांच में पाया गया कि योजना संख्या 01/2013-14 प्रखंड की टेसजोड़िया पंचायत के गांव चुनकुदर की दाग संख्या 1392 पर सिंचाई कूप का निर्माण कृष्णा मरांडी की जमीन पर स्वीकृत थी। इस निर्माण कार्य के लिए प्राक्कलित राशि 1 लाख 88 हजार 500 रुपए थी। इस कार्य के लिए मुखिया द्वारा कार्यादेश निर्गत किया गया। जबकि कार्य रोजगार सेवक युद्धपति खां द्वारा कराया गया। जिसका विपत्र कनीय अभियंता अजय किस्कू ने तैयार किया था। उक्त योजना से संबंधित जारी किए गए चेक को पदाधिकारी द्वारा अपनी मर्जी के अनुरूप रद्द किया गया। पदाधिकारियों द्वारा तीन चेक को रद्द कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में अपर समाहर्ता ने स्पष्ट कहा है कि राशि भुगतान में विलंब के लिए पंचायत सचिव समीर कुमार घोष तथा रोजगार सेवक युद्धपति खां को दोषी करार दिया गया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सामग्री में वास्तविक व्यय 56 हजार 424 रुपए है। परंतु उक्त राशि का एमआईएस भी नहीं कराया गया है। अपर समाहर्ता ने बीडीओ को निर्देश दिया है कि पंचायत सचिव समीर कुमार घोष के विरुद्ध प्रपत्र गठित करें तथा रोजगार सेवक से स्पष्टीकरण प्राप्त कर उनकी संविदा रद करते हुए उन्हें कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया है।