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गरीबों के सुख-दुख में साथ रहते हैं मुखिया

6 वर्ष पहले
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{ जमींदार होकर भी जमींदारी प्रथा का विरोध किया

शेखरसुमन|बिरनी

हरकोई अपनी पहचान किसी पद को ग्रहण करने के बाद ही बना पाता है या फिर उसके लिए कुछ भी करने को मजबूर हो जाता है। लेकिन बिरनी प्रखण्ड अन्तर्गत तुलसीटांड पंचायत के मुखिया राजकुमार नारायण सिंह किसी के सामने अपनी पहचान के लिए मोहताज नही है।

45 वर्षीय राजकुमार नारायण सिंह जमींदार घराने में जन्म लेने के बाद भी जमींदारी प्रथा का विरोध शुरू से करते रहे हैं। गरीबों शोषितों के बीच में रह कर उनके हर दुखः दर्द को बांटना इनकी फितरत रही है। तुलसीटांड पंचायत की बात करें तो जनधन योजना लागू होने के बाद दो दिन के अन्दर बैंक में कैम्प कर के अपने पंचायत के तमाम लोगों का खाता खोलवाने का काम किया। पंचायत के बजरंगी तर्वे, बासुदेव सिंह, सुनिल रजक, पन्नालाल विश्वकर्मा, सुरेश राम, मोहन दास, सुखलाल तुरी आदि दर्जनों लोगों की मानें तो गांव कस्बों का हर छोटे बडे मामले का निष्पादन यहाॅ के मुखिया चैपाल लगा कर करते हैं। इसी की देन है कि तुलसीटांड पंचायत का अधिकांश मामला थाना पहंुचने के बजाय गांव में ही सुलह हो जाता है। लोगों का पैसा समय बचता है।

रोजगार की समस्या को हल करने के लिए हैं सक्रिय

देखाजाय तो मुखिया राजकुमार नारायण सिंह के पास चार तालाब है। जिसमें प्रत्येक वर्ष मछली पालन करते है लेकिन जब भी किसी तरह का त्योहार आता है तो मछली बाजार में बेचने से पहले अपने पंचायत के गरीबों में मुफ्त बांटते हैं। बांटने के बाद बचा हुआ मछली व्यापारियों को दिया जाता है। इतना ही नही हर किसी को रोजी रोजगार के सवाल पर राशन पानी के साथ साथ आर्थिक मदद करने में भी हमेशा आगे रहे हैं। आलम यह है कि आये दिन इनके आवास पर लोगों की हुजूम रहती है। इसके अलावा कड़ाके की ठंड में सरकार द्वारा पंचायतों में वित्तरण करने के लिए कुल 80 कबंल दी गई थी। लेकिन मुखिया श्री सिंह ने अपने स्तर से पूरे पंचायत के गरीब, निःसहाय लोगों के बीच 200 कंबल का वित्तरण किया। यही वजह है कि तुलसीटांड पंचायत के अलावा दर्जनों गांवों के लोगों के दिलों में वे बसे हैं।

आसपासके दर्जनों गांवों में जाने जाते हंै मुखिया

मुखियाराजकुमार नारायण सिंह की पहचान अपने पंचायत ही नही बल्कि केषोडीह, थौरिया, डुरूवा, विशनपुरा, सरण्डा, मंझिलाडीह, बाराडीह, पिपराडीह, मंडरखा, बैदापहरी, नगलो, पेशम, गारागुरो, खेदवारा आदि दर्जनों गांव में है।

सेवा मेरा धर्म

^सेहुई भास्कर टीम की बात चीत में कहा कि चुनाव लड़ने के लिए यह सब नही कर रहा हूं। चुनाव लड़ना एक अलग बात है लेकिन गरीबों की सेवा करना एक अलग बात है गरीबों की हम मदद करंे यही हमारा धर्म है। सुबह से लेकर शाम तक हर घर की समस्या का समाधान करते करते कब दिन गुजर जाता है पता भी नही चल पाता है। मेरे पंचायत में विकास की रूप रेखा दूर से ही नजर आएगी। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। राजकुमारनारायण सिंह, मुखिया