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डीबी स्टार . निरसा

7 वर्ष पहले
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डीबी स्टार . निरसा

श्रीश्रीगोकुलानंद मठ दलदली आश्रम में पिछले 4 दिसंबर से आयोजित मां दुर्गा के 9 रूपों में से मां कात्यायनी की भव्य पूजा सोमवार को संपन्न हुई। उक्त मौके पर झारखंड, बिहार, बंगाल उड़ीसा से करीब 50 हजार की संख्या में भक्तों का सैलाब उमड़ा। इसमें बच्चे, बुजुर्ग, महिला पुरुष शामिल थे। पूरा मठ जय श्री गौर हरि के नारे से गूंज उठा।

कई भक्त दंडवत करते हुए मठ पहुंचे तथा कई भक्त हरे कृष्ण, हरे राम का जाप करते हुए जुलूस की शक्ल में मठ पहुंचे, जहां सभी भक्तों ने मां कात्यायनी निरंजन पूजा में सम्मिलित हुए। पिछले 4 दिसंबर से आयोजित मां कात्यायनी की पूजा में प्रथम दिन मठ में चंडी पाठ का आयोजन किया गया। दूसरे दिन महायज्ञ, तीसरे दिन लीला कीर्तन, चौथे पांचवें दिन भी लीला कीर्तन तथा छठे दिन मां का निरंजन के बाद महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इतने बड़े सफल आयोजन में मठ के आसपास के लोगों का काफी सरहानीय योगदान रहा।

पिछले52 वर्षो से मठ में 24 घंटे होती रही है हरिनाम संकीर्तन : श्रीश्रीगोकुलानंद मठ दलदली आश्रम दामोदर नदी तट पर स्थित का इतिहास काफी गौरवशाली है। यहां पर पिछले 52 वर्षो से 24 घंटे हरे कृष्णा, हरे राम का जाप होते रहा है। मठ में उपस्थित संन्यासी लोगों ने बताया कि मानव जीवन का कल्याण तथा विश्व शांति के लिए श्रीश्री सचिन बाबा ने उपासना इसी दामोदर नदी के तट पर किया था। इसके बाद यहां क्षेत्र के भक्तों ने मठ का रूप दिया। यहां सच्चे मन से आए सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।

अनूठासद्‌भाव देखने को मिला

आजजहां पूरे देश में धार्मिक स्थल आतंकवादियों के निशाने पर है, वहीं निरसा के सुदूर देहात क्षेत्र दामोदर नदी तट पर स्थित मठ की विशेषता कुछ अलग ही देखने को मिलती है। प्रत्येक वर्ष मां कात्यायनी उत्सव में 40 से 50 हजार की संख्या में भक्तों का जमावड़ा होता है। वहां सुरक्षा के नाम पर कोई पुलिस बल तैनात नहीं रहता है। इतनी बड़ी भीड़ को किसी भी प्रकार से नियंत्रण करने की आज तक दरकर नहीं पड़ी। भक्त खुले मैदान में अपने सामान को रख मठ में प्रवेश करते हैं, परंतु एक भी भक्त का किसी भी प्रकार के सामान की चोरी नहीं होती। वहीं इतने बड़े आयोजन के लिए किसी भी प्रकार का चंदा नहीं किया जाता है। भक्त स्वेक्षा से जो कुछ देते हैं मठ के लिए पर्याप्त होता है।

भव्यमंदिर बनाने का लिया ग