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लंबी दूरी के वाहन रहे बंद

6 वर्ष पहले
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गुरुवारको माअोवादियों के आहूत बिहार- झारखंड बंद का क्षेत्र में असर मिला जुला रहा। बंद का ज्यादा प्रभाव गुवा बड़ाजामदा क्षेत्र में देखा गया। गुवा बड़ाजामदा क्षेत्र के लौह अयस्क की निजी माइंसों में काम- काज ठप रहा। कई माइंसों के कर्मी तो बंद को देखते हुए बुधवार को ही घर लौट आए थे। इसके कारण लोडिंग डिस्पैच का काम बाधित रहा।

लौह अयस्क का उत्पादन ढुलाई नहीं होने के कारण करोड़ों रुपए के नुकसान का अनुमान है। चाईबासा झींकपानी, जगन्नाथपुर, हाटगम्हरिया, जैंतगढ़, नोवामुंडी में बंद का आंशिक असर पड़ा। बंद के कारण सुबह से ही लंबी दूरी की बसें नहीं चली। भारी मालवाहक वाहनों का परिचालन ठप रहा। हालांकि, सरकारी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में आम दिनों की तरह काम- काज होते रहे। पेट्रोल पंप खुले रहे। बाजार में सामान्य दिनों की तरह ही चहल- पहल रही, लेकिन लंबी दूरी के यात्री वाहनों के पहिए थमे रहे। इस दौरान चाईबासा से रांची किरीबुरू जाने वाली सभी बसें बस स्टैंड में शाम तक खड़ी रहीं। दूसरी ओर लोकल बसों का परिचालन आम दिनों की तरह जारी रहा। बंद के मद्देनजर क्षेत्र में सुबह से ही पुलिस गश्त तेज रही। सड़कों पर भी पुलिस तैनात रही, जबकि सारंडा पोड़ाहाट क्षेत्र में भी पुलिस गश्त लगाती रही। सुरक्षा के लिहाज से जगह- जगह पर सीआरपीएफ जिला पुलिस बलों की तैनाती की गई थी। बंद दौरान कहीं से कोई अप्रिय घटना की सूचना है।

सड़कें सुनसान, बाजार गुलजार

गुवा।गुरुवार बड़ाजामदा की सड़कें सूनी रहीं, परंतु छुट्टी तथा सड़कों पर वाहन नहीं चलने के कारण बाजार गुलजार नजर आए। सुबह लोगों की चहल-पहल बाजार में देखने को मिली, जो कि दोपहर दो बजे तक रही। बंदी से लोग आराम के मूड में दिखे, कइयों ने इस अवसर पर पिकनिक का आनंद भी लिया। बंदी का असर सबसे ज्यादा सड़कों खदानों में दिखाई दिया। भारी वाहन के बराबर चले, जबकि क्षेत्र में कार्यरत एकमात्र उषा मार्टिन की खदान बंद रही। पेट्रोल पम्प भी बंद थे। बंद से बड़ाजामदा में दो करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित रहा।

सेलमें नहीं दिखा बंद का असर

किरीबुरू।माओबंदी का क्षेत्र में मिला-जुला असर देखा गया। सेल के किरीबुरू मेघाहातुबुरू लौह अयस्क खदान क्षेत्र में बंद का कोई असर नहीं देखा गया। अन्य दिनों की तरह ही लौह अयस्क की लदाई का कार्य जारी रहा। इस तरह से ही सरकारी या गैर सरकारी प्रतिष्ठानों का कार्य जारी रहा। किरीबुरू से चलने वाली लंबी दूरी की यात्री बसें नहीं चली। यहां से निचले क्षेत्रों में स्थित प्राइवेट खदानों का उत्पादन एवं लदाई कार्य प्रभावित रहा।

माओवादी बंदी के दौरान किरीबुरू में खड़ी यात्री बसें।