वन है तो जीवन हैःमुखिया
नोवामुंडी| ग्रामवनाधिकार पर एक सम्मेलन रविवार को कुटिंगता के हवाई पट्टी मैदान में हुआ। इसमें 22 गांवों के वन सुरक्षा समिति के पदाधिकारी ग्रामीण सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए कोटगढ़ पंचायत के मुखिया रमेश चंद्र तिरिया ने कहा कि वन है, तो जीवन है। 10 साल पहले जंगलों में सियार, भालू, लोमड़ी, मोर, खरगोश और जंगली सुअर दिखाई देते थे, जो अब लुप्त हो गए हैं हाथी सारंडा जंगल छोड़कर गांव और आबादी में गए हैं उन्होंने एक पेड़ काटने पर 10 वृक्ष लगाने की अपील की वनपाल रविदास ने कहा कि जन्म से मरण तक मनुष्य का जंगल के साथ पूरक संबंध है उन्होंने गांव वालों को एक शिक्षक की तरह फोरेस्ट का शब्दिक अर्थ बताया। आदिवासी एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय तिरिया ने कहा कि खनन कंपनी साल पेड़ों को काटती हैं और यूकिल्पिटस जैसे पर्यावरण को नुकसान पहुचाने वाला पेड़ लगाती हैं। इसीलिए इस क्षेत्र का जलस्तर नीचे चला गया है। मुंडा अजय पूर्ति ने कहा जलावन के लिए साल पेड़ काटने से पर्यावरण बिगड़ रहा है। इसके अलावा सम्मेलन को धनसिंह कैरम डूकरा पूर्ति, चंद्रमोहन पूर्ति, सुरेश पूर्ति, सोनाराम, नाजीर तिरिया, बंसती कैरम, बाबूलाल तिरिया, मंगलसिंह पूर्ति, रमेश लामाय, जटिया पूर्ति ने सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता सुरेंद्र बलमुचू ने की।