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खरीफ की फसल बर्बाद धान के खेतों में पड़ी दरार
जिलेमें सुखाड़ की स्थिति भयावह हो गई है। खरीफ की फसल बर्बाद हो गई है। धान के खेतों में दरार पड़ गए हैं। सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण यह स्थिति बनी है।
सितंबर में जिले में सामान्य बारिश 206.7 एमएम की जगह अब तक सिर्फ 110.3 एमएम ही हुई है। बारिश नहीं होने से मक्के की फसल झुलस गई। दलहन की स्थिति भी ठीक नहीं है। तिल , उरद, बराई में दाने नहीं पड़े। अब धान की फसल भी नष्ट होने लगी है। हालांकि जिला प्रशासन ने ग्रामीण विकास मंत्री केएन त्रिपाठी की अध्यक्षता में विधानसभा द्वारा गठित कमेटी को सुखाड़ की अनुशंसा कर दी थी। लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं की गई। इस हालात के कारण किसानों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। किसान समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर क्या करें।
महीना होना चाहिए हुआ
जून152.4 40.6
जुलाई 344.7 151.6
अगस्त 388.1 169.1
सितंबर 206.7 110.3
सीएम के आश्वासन पर भी कुछ नहीं हुआ : त्रिपाठी
ग्रामीणविकास मंत्री केएन त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने कैबिनेट में 20 दिन पहले ही पलामू और गढ़वा को सुखाड़ क्षेत्र घोषित करने और यहां राहत कार्य चलाने की अनुशंसा की थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद अब तक कोई घोषणा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वे पलामू और गढ़वा में प्रखंड स्तर पर यूनिक कमांड स्थापित कर अलग कोष बनाकर राशि उपलब्ध कराने की अनुशंसा भी की थी। ताकि यहां राहत कार्य चलाया जा सके। वैकल्पिक खेती के लिए बीज का वितरण किया जा सके। किसानों को डीजल का मुआवजा मिले।
हरिहरगंज में धान के फसल की ऐसी है स्थिित।
किसानों के सामने भुखमरी की स्थिति