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नक्सल इलाकों में नहीं लग रहे मोबाइल टावर

6 वर्ष पहले
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राज्यके नक्सल प्रभावित इलाकों में उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मोबाइल नेटवर्क को मजबूत करने की केंद्र सरकार की योजना अबतक सफल होती नहीं दिख रही है। केंद्र सरकार के लगातार निर्देश के बावजूद मोबाइल टावरों के स्थापित करने योजना पूरी नहीं हो पाई है।

राज्य के विभिन्न जिलों में भूखंड, एनओसी और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की वजह से मामला अटका पड़ा है।विभिन्न जिलों में 619 स्थानों पर तय योजना के तहत मोबाइल टावरों के अधिष्ठापन का काम नहीं हो सका है।

राज्य के 18 जिले ऐसे हैं जहां 319 मोबाइल टावरों के लिए भूमि तो उपलब्ध कराए जा चुके हैं लेकिन इसके लिए एनओसी नहीं जारी किया जा सका है। इन जिलों में सबसे ज्यादा लातेहार, खूंटी, लोहरदगा में 42-42, गुमला में 41, रांची, सिमडेगा और चतरा में 22-22, हजारीबाग में 15 तथा देवघर एवं दुमका में 14-14 स्थानों पर मोबाइल टावरों का अधिष्ठापन किया जाना है। इसके अलावा बोकारो, गोड्‌डा, जामताड़ा, पाकुड़, कोडरमा, रामगढ़, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला में भी कई स्थानों पर भूखंड देने के बावजूद एनओसी उपलब्ध नहीं कराया जा सका है।

अब एक बार फिर मोबाइल टावरों की जल्द से जल्द स्थापना के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रयास शुरू किए गए हैं। मुख्य सचिव राजीव गौबा ने राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों एवं उपायुक्तों को पूरे मामले की जानकारी देते हुए भूमि उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने कहा है कि उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण के लिए डीसी-एसपी अपने अपने जिलों में मोबाइल टावरों के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराएं। स्थल चयन में स्थानीय थाना परिसर या सुरक्षा बल के परिसर को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही जिन मोबाइल टावरों के लिए भूमि उपलब्ध कराया गया है उसका नक्शा बीएसएनएल को उपलब्ध कराया जाए। एसपी को कहा गया है कि जहां निर्माण कार्य हो रहा है वहां असमाजिक तत्वों द्वारा कोई बाधा उत्पन्न किया जाए। मुख्य सचिव ने डीसी एसपी को एक एक नोडल पदाधिकारी नामित करने के साथ ही हर 15 दिनों में प्रगति की समीक्षा कर रिपोर्ट भेजने को भी कहा गया है।

राज्य के 17 जिले ऐसे हैं जहां 278 मोबाइल टावरों के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। भूखंड के मामले में सबसे ज्यादा पलामू जिले में स्थिति खराब है। वहां 72 मोबाइल टावरों का अधिष्ठापन किया जाना है जिसके लिए भूमि नहीं दी गई है। इसके अलावा साहेबगंज में 38, खूंटी में 30 मोबाइल टावरों का मामला भूमि नहीं मिलने की वजह से अटका हुआ है। जबकि 10 जिलों में 14 मोबाइल टावरों के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिल पाया है। जबकि आठ मोबाइल टावरों का मामला इसलिए लंबित हैं कि आवंटित जमीन का स्थान बदला जाना है।

{केंद्र लगातार दे रहा निर्देश, भूखंड की है मुख्य समस्या