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40 एकड़ पोस्ते की फसल रौंदी

5 वर्ष पहले
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ऐसे हुई पोस्ते की खेती की शुरुआत

पोस्ताकी खेती की शुरुआत बालूमाथ और हेरहंज थाना क्षेत्र में वर्ष 2007 से हुई। उस समय बाहर से आए तस्करों ने भोले-भाले ग्रामीणों को सफेद फुल की खेती करने का तरीका बताते हुए बीज, दवा समेत सारे साधन उपलब्ध कराएं। दो वर्षों तक किसी को इस बात की भनक नहीं लगी। जब नारकोटिक्स विभाग और पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो लोगो की नींद खुली।

हेरहंज में पोस्ता के पौधों को नष्ट करती पुलिस।

भास्कर न्यूज | हेरहंज

हेरहंजथाना पुलिस और सीआरपीएफ ने शनिवार को संयुक्त अभियान चलाकर लगभग 40 एकड़ भूमि में लगी पोस्ते के अवैध फसल को नष्ट किया। इसे मौत के सौदागरों ने हेरहंज थाना क्षेत्र अंतर्गत लातेहार और पलामू जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के कुरांग जंगल में लगाया था। अवैध रूप से लगाई गई पोस्ते की फसल को नष्ट करने के लिए पुलिस ने छह ट्रैक्टर का प्रयोग किया। साथ ही जवानों ने लाठी-डंडे से भी पोस्ते की अवैध फसल को नष्ट की। नष्ट फसल सुरक्षित वन क्षेत्र और नदी के किनारों पर लगाई गई थी। जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक अनूप विरथरे को मिली गुप्त सूचना के आधार पर सर्किल इंस्पेक्टर संजीव मिश्रा, थाना प्रभारी योगेंद्र पासवान और सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट उपेंद्र कुमार के नेतृत्व में अभियान चलाया गया। अभी भी लातेहार जिले के हेरहंज, बालूमाथ, लातेहार समेत कई जंगली क्षेत्रों में पोस्ते की अवैध फसल लहलहा रही है। थाना प्रभारी योगेंद्र पासवान ने कहा कि किसी भी सूरत में इस तरह के कार्य करने वालों को बक्सा नहीं जाएगा। इसमें संलिप्त रहनेवालों पर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी। अभियान सुबह से लेकर देर शाम तक चला।

पोस्तेके फल में शाम को लगाते हैं चीरा

इसफसल में लगने वाले फल में शाम के समय में चीरा भी लगाया जाता है। दूसरे दिन सुबह में उसके रस को एकत्र कर शुद्ध अफीम तैयार की जाती है। जिससे हेरोइन, चरस समेत कई नशा युक्त सामग्री तैयार की जाती है। अफीम की कीमत 40 से 50 हजार रुपए प्रति किलोग्राम शुरुआती दौर में होती है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपए कीमत हो जाती है।

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