विभागीय आदेश के बाद भी जांच नहीं कर रहे अधिकारी
{महिला विकास विभाग के संयुक्त सचिव ने डीसी पलामू को लिखा था पत्र
{सीएम के वरीय सचिव ने भी लिखा था बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को
भास्करन्यूज|मेदिनीनगर
पाटनपरियोजना में प्रतिनियुक्त रहीं महिला पर्यवेक्षिका शांति कमलेश पिछले चार साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्हें 2011 में पद से बर्खास्त कर दिया गया था। मुख्यमंत्री और सरकार के सचिव से गुहार लगा चुकी हैं। सचिव के आदेश के बाद भी समाज कल्याण, महिला विकास विभाग के संयुक्त सचिव बसंत कुमार दास ने इस संबंध में पलामू डीसी को 4 जुलाई 2013 को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कर रिर्पाेट सौंपने का निर्देश दिया था।
बावजूद इसके इस दिशा में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री के वरीय सचिव संजय बसू ने भी बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिख कर पाटन के पर्यवेक्षिका शांति कमलेश की याचिका पर जांच करने का आग्रह किया था। बावजूद इसके इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई। रांची से आए पत्र को विभाग के कुछ लोग दबा दे रहे हैं। इस संबंध में शांति कमलेश ने बताया कि नियम विरूद्ध तरीके से उन्हें बर्खास्त किया गया है। उनसे स्पष्टीकरण भी नहीं मांगा गया और उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
एक-दो दिनों में उचित कार्रवाई की जाएगी : मेघनाथ उरांव
समाजकल्याण पदाधिकारी मेघनाथ उरांव ने बताया कि उन्होंने 15 दिन पूर्व इस पद पर योगदान दिया है। पाटन की बर्खास्त महिला पर्यवेक्षिका की जांच से संबंधित पत्र उन्हें नहीं मिला है। इस मामले से जुड़ी फाइल को एक-दो दिनों के अंदर देखेंगे। उस पर उचित कार्रवाई करेंगे। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।
आदेश का पालन नहीं होना जांच का विषय है : डीसी
पलामूडीसी के श्रीनिवासन ने बताया कि वरीय अधिकारियों के आदेश का अनुपालन अब तक क्यों नहीं किया गया। यह जांच का विषय है। उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में अभी तक नहीं अाया है। वे इस बाबत समाज कल्याण पदाधिकारी से विमर्श करेंगे और कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला
महिलापर्यवेक्षिका पर 2011 पर आंगनबाड़ी सेविका से अवैध वसूली और पोषाहार में गड़बड़ी का आरोप लगा था। इस आलोक में तत्कालीन समाज कल्याण पदाधिकारी ने मामले की जांच कर कार्रवाई के लिए लिखा था। इसके बाद तत्कालिन डीसी ने प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी अमित कुमार से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। जांच में आरोप सही पाया गया था। इसके आधार पर जिला स्थापना समिति ने उन्हें पर्यवेक्षिका पद से बर्खास्त करने का निर्णय लिया था। लेकिन, पर्यवेक्षिका शांति कमलेश ने उसी समय जांच रिपोर्ट को एकतरफा करार दिया था और फिर से जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान उनसे पूछताछ भी नहीं की गई। उनसे स्पष्टीकरण भी नहीं मांगा गया। सिर्फ एक ही पक्ष को सुना गया और उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। शांति का आरोप है कि उनकी बातों को जिला प्रशासन ने कभी नहीं सुना। वे उस समय से लगातार न्याय की गुहार लगा रही हैं।
महिला पर्यवेक्षिका शांति कमलेश।