ताजा फल-सब्जी दूध में हम लिखेंगे नई इबारत
झारखंडके किसानों को 11 फरवरी को दो सौगातें मिलने जा रही हैं। पहली सौगात होटवार में नवनिर्मित एक लाख लीटर क्षमता का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट है, जिसका उदघाटन मुख्यमंत्री रघुवर दास करेंगे। यह प्लांट झारखंड सरकार नेशनल डेयरी डेवलमेंट बोर्ड की सहयोगी संस्था झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ के संयुक्त प्रयास का प्रतिफल है। दूसरी सौगात नगड़ी में 25 हजार मीट्रिक टन का फ्रूट-वेजिटेबल प्रोसेसिंग प्लांट है, जिसका शिलान्यास भी मुख्यमंत्री करेंगे। इसे एनडीडीबी की कंपनी सफल द्वारा स्थापित किया जाना है। यह जानकारी एनडीडीबी के चेयरमैन टी. नंदकुमार ने रांची में बुधवार को प्रेस वार्ता में दी। इस मौके पर सफल कंपनी के डायरेक्टर शिवा नागरन चीफ मार्केटिंग ऑफिसर सौगत मित्रा आदि उपस्थित थे।
पत्रकारों से बातचीत करते एनडीबीबी के चेयरमैन टी. नंदकुमार अन्य।
फैक्ट शीट
फैक्ट शीट
30 करोड़से होटवार में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट 14 माह में शुरू।
01लाखलीटर होगी प्लांट की क्षमता।
500ग्रामएक लीटर के पैकेट में दूध-दही के साथ घी भी उतारे जाएंगे मार्केट में।
24माहमंे क्षमता 1 लाख 30 हजार होगी।
02 सालका है प्रोजेक्ट
05हजारमीट्रिक टन का मटर फ्रोजिंग प्लांट लगेगा पहले साल
20हजारमीट्रिक टन का टमाटर अन्य फल-सब्जी प्रोसेसिंग यूनिट लगेगा दूसरे साल
50हजारकिसानों को पहुंचेगा फायदा
टी. नंदकुमार के अनुसार, इस प्लांट से केवल झारखंड को ताजा दूध उपलब्ध होगा, बल्कि दुग्ध उत्पादकों को भी सीधा फायदा मिलेगा। सरकार ने मदर डेयरी मेधा नाम में मामूली तब्दीली करते हुए मेघा गाय दूध कर दिया है। अब इस नाम से मार्केट में दूध पैकेट आएंगे। इस प्रोसेसिंग प्लांट में रांची, रामगढ़, खूंटी, लोहरदगा तथा हजारीबाग के दुग्ध उत्पादकों का दूध संग्रहित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब तक अन्य नए प्रोसेसिंग प्लांट तैयार नहीं हो जाते, कोडरमा, चतरा, पलामू देवघर के भी दूध उत्पादकों का दूध संग्रहित कराया जाएगा। ओरमांझी प्लांट को देवघर शिफ्ट किया जाएगा। इसकी क्षमता 20 हजार लीटर होगी। वहीं कोडरमा में 10 हजार लीटर का नया प्लांट बनाया जाएगा।
नंदकुमार ने बताया कि यह पूर्वोत्तर भारत का पहला प्लांट होगा। इसके माध्यम से किसानों के खेतों से माल सीधे खरीदा जाएगा। कंपनी किसानों को उन्नत बीज उच्च तकनीक भी मुहैया कराएगी। झारखंड हरे मटर, टमाटर, अदरक, पत्तागोभी, सेम, इमली, कटहल और आम के लिए पूर्वी भारत का केंद्र है। उन्होंने कहा कि सीजन में किसानों को इसका फायदा नहीं मिल पाता है। बिचौलिए उसका फायदा उठा ले जाते हैं। इसे देखते हुए उनके मन में प्लांट लगाने की बात आई थी।