पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • आज के शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों का योगदान अहम : सांसद

आज के शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों का योगदान अहम : सांसद

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नगरउंटारीके सरस्वती विद्या मंदिर में विद्या विकास समिति के तत्वावधान में प्रांतीय प्राधानाचार्य सम्मेलन का उदघाटन विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री जेएम काशीपति पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने भारत माता सरस्वती माता की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस दौरान मुख्य अतिथि काशी पति ने सम्मेलन में उपस्थित राज्य के सभी विद्या भारती से आए प्रधानाचार्य को संबोधित करते हुए कहा कि आज के परिवेश में अच्छी शिक्षा की जरूरत है। जिसे विद्या भारती पूरे हिंदुस्तान में शिक्षा क्षेत्र में एक पहचान बनाया है।

उन्होंने कहा कि विद्या भारती शिक्षण संस्थान से निकलकर छात्र आज देश के विभिन्न सर्वोच्च स्थान बनाकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मिशन की सफलता का मुख्य धारक विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य है। उन्होंने उपस्थित सभी प्रधानाचार्य को आगामी दस वर्षों में योजना बनाकर प्रत्येक जिला केन्द्र में एक आदर्श विद्यालय विकसित करने की अपील की। सांसद विष्णुदयाल राम ने कहा कि आज के शैक्षणिक परिवेश में शिक्षक का अहम योगदान रहता है। ऐसे में विद्या भारती संस्थान अपने आप में अनोखा है जो विद्यालय मे शिक्षा के साथ देश की संस्कृति छात्र-छात्राओं के भविष्य की रूपरेखा बनाती है।

आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का अध्यक्षता विद्यालय प्रबंधन के उपाध्यक्ष सह भारतीय स्टेट बैंक के फील्ड अफसर सुभाष मिश्रा ने किया। वहीं विद्यालय कें प्रधानाचार्य उदय नारायण द्विवेदी ने उपस्थिति अतिथितियों का परिचय कराया। इस दौरान विद्या मंदिर के संयोजक शारदा महेश प्रताप देव, महेश प्रसाद साहू, डाॅ. धर्मचन्द्र अग्रवाल, विनय प्रताप देव, अश्विनी कुमार, सुनील कुमार, राजकुमार प्रसाद, दिलेश्वर सिंह, विकास स्वदेशी, कौशलेन्द्र झा, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य, पूर्ण कालिक सदस्यों सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे। सम्मेलन के प्रथम सत्र में विद्या भारती के उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री दिवाकर घोष ने उपस्थित प्राधाचार्यों को कहा कि 62 वर्ष की अवस्था को रथपूर्ति कहा जाता है। उन्होंने कहा कि मानव के जीवन में इसका अर्थ होता है कि इस अवधि के कार्यों का स्वमूल्यांकन करना चाहिए। दूसरे सत्र में झारखंड के प्रांत प्रचारक अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि हमारा चिंतन सर्वव्यापी सर्वस्पर्शी है। उन्होंने कहा कि सभी व्यक्ति को कार्य चिंतन, चर्चा तथा सामूहिक निर्णय लेना चाहिए। तीसरे सत्र में उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री कमल किशोर सिन्हा ने कहा कि विद्या भारती का लक्ष्य पूर्ति का केन्द्र विद्यालय है। तथा इसका केन्द्र बिंदु का महत्वपूर्ण व्यक्ति विद्यालय के प्राधानाचार्य हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय के चार स्तंभ है जिनमें भैया बहन, अभिभावक, आचार्य प्रबंधन समिति है।