जिले में सूखे की मार झेल रहे हैं किसान
वैकल्पिक बीज के लिए भेजा है प्रस्ताव : डीसी
अब बात रबी की होनी चाहिए खरीफ में ही उलझी है सरकार
मवेशियों के सामने चारे की भी समस्या उत्पन्न
अनुमान पर आधारित आंकड़े
किसान भी पलायन करने को मजबूर
डीसी केएन झा ने बताया कि वैकल्पिक बीज के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही यह बीज किसानों को उपलब्ध करवा दिया जाएगा। उधर, जिला कृषि पदाधिकारी नरेश चौधरी ने कहा कि हालात से विभाग को अवगत करवा दिया गया है। दिशा-निर्देश मिलते ही उचित कदम उठाया जाएगा।
भास्कर न्यूज . मेदिनीनगर
जिले में सुखाड़ की स्थिति है अभी तक प्रशासन स्तर पर किसानों के राहत पहुंचाने के लिए कोई पहल नहीं की। राज्य की सरकार और उसकी मिशनरी कितना क्रियाशील है, इसका अंदाजा कृषि विभाग के कार्यों और उसके कार्यक्रमों से भी लगाया जा सकता है। पलामू में अभी भी खरीफ फसल पर ही बात हो रही है। जबकि समय रबी फसल पर बात करने का समय गया है। ऐसी स्थिति में किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ सकता है। देर होने पर रबी फसल की बुआई भी समयपर नहीं हो पाएगी। स्थिति यह है कि जिले के कई प्रखंडों के सैकड़ों गांवों में पिछले वर्ष भी और इस वर्ष भी धान का एक बिचड़ा भी नहीं रोपा गया है। वैसे किसानों के लिए कृषि विभाग दो माह पहले से आकस्मिक या वैकल्पिक खेती की बात करता रहा है। लेकिन अभी तक उस पर बात प्रस्ताव से आगे नहीं बढ़ सकी है। बुआई के लिए मांगा गया सरसों और मटर का बीज अभी तक यहां नहीं पहुंचा है।
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सूखे से किसानों के समक्ष भुखमरी की हालत बन गई है। वर्षा के अभाव में मक्के की फसल नहीं हो पाई, दलहन भी बर्बाद हो गया। कुछ किसानों धनरोपनी की, लेकिन वह भी खराब हो गई। हालात ये हैं कि मवेशियों के लिए चारा तक नहीं मिल रहा। उधर, पांडू क्षेत्र में भी भदई फसल बर्बाद हो गई है। अब तक वैकल्पिक खेती के लिए बीज भी किसानों को नहीं मिला है। किसान परेशान हैं। कई किसानों के खेत में ही धान के बिचड़ा रह गए। मकई फसल का फसल भी बर्बाद हो गया। तिलहन की फसल तिल भी नहीं के बराबर है।
पलामू में धान के आच्छादन का प्रतिशत 25.4 बताया गया है। जबकि मक्का की बुआई 81.3 प्रतिशत होने की बात कही गयी है। दलहन फसलों का आच्छादन 73.1 और तिलहन की बुआई 61.7 बताया गया है। सच यह है कि कृषि विभाग के यह आंकड़े भी उनके पदाधिकारियों के अनुमान पर आधिारित है। जो फील्