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उचित समय पर लूंगा फैसला : राज्यपाल

6 वर्ष पहले
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कहा, सारे तथ्यों को देखने के बाद ही इस मामले पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।

पॉलिटिकलरिपोर्टर| पटना

राज्यपालकेशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि जदयू नेता नीतीश कु़मार की मांग पर उचित समय पर फैसला लूंगा। समय चाहिए। नौ फरवरी को ही उनलोगों ने मांग मेरे समक्ष रखी है। अभी दो दिन ही हुए हैं। इतना हड़बड़ा क्यों गए हंै। राज्यपाल हो या न्यायिक विशेषज्ञ सभी को समय चाहिए। सारे तथ्यों को देखने के बाद ही इस मामले पर कोई निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के नेता चुने जाने पर पटना हाईकोर्ट का निर्णय आया है। इस निर्णय को भी देखूंगा, फिर निर्णय लूंगा। इधर, जदयू नेताओं की मांग है कि जल्द-से-जल्द राज्यपाल विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने के लिए तिथि की घोषणा करें। ताकि बहुमत किसके पास है, साबित हो। ऐसे मामले में विचार के लिए 24 घंटे का समय पर्याप्त होता है।

हाईकोर्ट के आदेश को लेकर फैलाई जा रही भ्रांति : शाही

पटना | पूर्वमंत्री पीके शाही ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। कोर्ट ने ना तो जदयू के विधानमंडल दल की बैठक पर एतराज जताया है और ही नीतीश कुमार के नेता चुने जाने पर आपत्ति की है। कोर्ट ने सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष ने नीतीश को जो मान्यता दी है, उस पर राज्यपाल के फैसला तक रोक लगाई है। इसके अलावा कोर्ट ने कोई बात नहीं की है। शाही बुधवार को जदयू के प्रदेश कार्यालय में संवाददाताओं से बात कर रहे थे। शाही ने कहा कि प्रजातंत्र में सिर्फ बहुमत के आंकड़े का महत्व होता है। जदयू और सहयोगी दलों के 130 विधायक चट्टानी एकता के साथ नीतीश के साथ खड़े हैं। नेता कौन होगा, यह विधानसभा के फ्लोर पर तय होगा। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को अब राज्यपाल कब समय देते हैं, यह देखना है। हमें राज्यपाल से उम्मीद थी कि वे नीतीश को जल्द सरकार बनाने का मौका देंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। हमने 8 फरवरी को ही 130 विधायकों की सूची राजभवन को सौंप दी थी, 11 तारीख गई। राज्यपाल को तुरंत फैसला लेना चाहिए।

पटना | राजदसांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा है कि पटना उच्च‍ न्यायालय ने संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा की है। संविधान के चीरहरण की एक और कोशिश को कोर्ट ने नाकाम कर दिया है। विधानसभा अध्‍यक्ष उदय नारायण चौधरी ने संविधान के प्रावधानों की अनदेखी कर विधान मंडल में नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल की नेता की मान्‍यता दी थी। बहुमत विधानसभा में तय होता है। इसके लिए मार्च और परेड की कोई जरूरत नहीं है। यादव ने कहा कि कुछ लोग सत्ता के पीछे भाग रहे हैं और वह मांझी सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। पटना हाईकोर्ट के निर्णय से उनके प्रयासों को धक्का लगा है। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार ठेकेदारी नियमावली 2007 में संशोधन कर एक ऐतिहासिक काम किया है। पोशाक, साइकिल और स्कॉलरशिप की राशि भुगतान के लिए 75 फीसदी की अनिवार्यता समाप्त करने और सवर्ण गरीबों को आरक्षण देने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने की घोषणा भी स्वागत योग्य है। यह जाति, समाज और वोट से ऊपर उठकर राजनीति करने की कोशिश है।





ऐसी कोशिशों से समाज आगे बढ़ेगा।