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प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे कचनपुरवासी

7 वर्ष पहले
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पाटन. पाटनप्रखंड के कचनपुर गांव केंद्रीय बीपीएल मॉनीटरिंग टीम का सर्वेक्षण दल रविवार को पहुंचा जांच के क्रम में यह बात सामने आई की इस गावं में एक भी बीपीएल परिवार नहीं है। जबकि गांव की आबादी 400 है। यहां 95 प्रतिशत आबादी हरिजन-आदिवासी पिछड़ी जाति की है। 2007 की बीपीएल सूची निर्धारण में एक भी व्यक्ति का नाम शामिल नहीं है। जबकि हकीकत है कि यहां के निवासी अत्यंत गरीब तथा मजदूरी पर ही निर्भर हैं। केंद्रीय बीपीएल मॉनिटरिंग टीम के सर्वेक्षण दल जब यहां पहुंचा तो इनके साथ बीडीओ वीरेंद्र सोय पंचायत सेवक रवींद्र सिंह भी साथ थे। टीम लीडर डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि निवासियों की भौतिक स्थिति गरीबी-रेखा में शामिल होने की है जो सारी अहर्ताएं पूरी करती है। प्रशासन ने भी स्वीकार किया कि यहां के निवासियों की भूल से लोड नहीं हो पाया। नेशनल मॉनिटरिंग टीम ने मनरेगा वृद्धापेंशन तथा पेयजल की स्थिति का भी जायजा लिया। यह टीम ने कचनपुर, सूठा, किशुनपुर सगुना गांव का भी जायजा लिया।