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पति की जलती चिता में कूद कर दे दी जान

7 वर्ष पहले
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पतिके जलती चिता में प|ी के कूद कर मरने का मामला सामने आया है। यह घटना सहरसा जिले के कहरा प्रखंड के सोनवर्षा कचहरी ओपी के परमिनियां गांव की है। रामचरित्र मंडल इसी गांव के रहने वाले थे। कैंसर से पीड़ित रामचरित्र की शनिवार को मौत हो गई थी। हद तो तब हुई, जब गांव के लोगों ने उन्हें बचाने के बदले जलती चिता में कुछ और लकड़ी को डालकर दिवा देवी को भी जला दिया। जलती चिता में कूदकर जिंदा जलने का यह पहला मामला है। अपने पति के मरने का गम उनकी प|ी दिवा देवी सहन नहीं कर सकी और जलती चिता में कूद गई। परिजनों ने इस मामले में फिलहाल कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है, जबकि पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है।

पति से बेहद प्यार करती थी गहवा देवी

रामचरित्र मंडल

दिवा देवी



ग्रामीणोंने बताया कि 13 दिसंबर शनिवार की सुबह रामचरित्र मंडल (75 वर्ष) की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। वे पिछले लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। परिजन दाह संस्कार में जाने से पहले पटना में रह रहे उसके भतीजे सूरज मंडल के आने का इंतजार कर रहे थे। शाम में सूरज के आने पर परिजन उसकी लाश को लेकर घर के बगल की चहारदीवारी के अंदर दाह संस्कार करने चले गए। चिता को जलाकर घर लौटने पर नातिन राधा, नानी गहवा देवी को खोजने लगी, लेकिन वह घर पर नहीं थी। दिवा देवी के घर में नहीं मिलने पर परिजन जलती चिता की ओर दौड़े। जब तक लोग चिता के पास पहुंच पाते इससे पहले दिवा देवी ने जलकर अपनी जान दे चुकी थी। दिवा देवी पहले भी इस प्रकार की बात परिजनों से किया करती थी। परिजनों का कहना है कि वे अपने पति से काफी प्रेम करती थी। वे बार-बार कहा करती थी कि पति के मरने पर हम उनकी चिता के साथ ही जल जाएंगे। परिजन का कहना है कि जलती चिता के पास हम लोग जबतक पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी। दिवा देवी अपने पति की जलती चिता पर जलकर जान दे चुकी थीं। इसी कारण लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास करने के बदले जलती चिता में कुछ और लकड़ी को डालकर दिवा देवी को भी जला दिया।