- Hindi News
- पर्दे के पीछे रह कर सारा खेल करा रहे प्रधानमंत्री
पर्दे के पीछे रह कर सारा खेल करा रहे प्रधानमंत्री
पर्दे के पीछे रह कर सारा खेल करा रहे प्रधानमंत्री
पॉलिटिकलरिपोर्टर |पटना
पूर्वमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी द्वारा जीतन राम मांझी को बजट सत्र के पहले दिन विश्वास मत साबित करने पर मौका देने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुरुवार को पटना पहुंचने के बाद नीतीश ने कहा कि राज्यपाल और भाजपा संसदीय लोकतंत्र की हत्या करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। पर्दे के पीछे रह कर सारा खेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करा रहे हैं। मांझी ने प्रधानमंत्री से मिलने के बाद तोड़-फोड़ शुरू कर दिया है। भला यह प्रधानमंत्री के साथ कैसी मुलाकात थी जो एक फोटो तक जारी नहीं किया गया। जानबूझ कर बिहार का माहौल प्रदूषित किया जा राह है ताकि राष्ट्रपति शासन लगाया जा सके। जदयू और उसके सहयोगी दल इसका पूरजोर विरोध करेंगे। राज्यपाल को बताना चाहिए कि वे विधानसभा में कौन सी सरकार का अभिभाषण पढ़ेंगे?
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में पांच पार्टियां हैं। इसमें से जदयू, राजद, कांग्रेस और सीपीआई एक साथ हैं। दूसरी ओर भाजपा हैं, लेकिन उसने भी जीतन राम मांझी की सरकार को साफ तौर पर अपना समर्थन नहीं दिया है। पहले राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी और फिर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करने के बाद हम लोगों ने मुख्यमंत्री को बहुमत साबित करने के लिए बजट सत्र से पहले विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। हमें उम्मीद थी कि त्रिपाठी विशेष परिस्थिति को देखते हुए विशेष निर्णय लेंगे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। लंबा समय देकर विधायकों की खरीद-फरोख्त और जोड़-तोड़ का मौका दे दिया गया है। लेकिन अब तो सबकुछ दिल्ली से ऑपरेट हो रहा है।
नीतीश ने कहा कि 20 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सीएम विश्वास मत लेने का प्रयास करेंगे। यह सीधे-सीधे संसदीय लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। विधानसभा में पांच पार्टियां हैं। इसमें से चार जदयू के साथ हैं और भाजपा ने भी अपना रूख अभी स्पष्ट नहीं किया है तो क्या त्रिपाठी 12 विधायकों वाली मांझी की सरकार का अभिभाषण पढ़ेंगे? ऐसा करके वे क्या संदेश देना चाहते हैं। राज्यपाल पहले हमारे तर्क से सहमत थे।